अनोखा तीर, हरदा। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों का भारी टोटा है। इस समस्या से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के सपनों के सीएम राइज स्कूल भी अछूते नहीं हैं। पोर्टल पर शिक्षकों की कमी वाले दिखाई दे रहे ऐसे सभी स्कूलों में जनजातीय कार्य विभाग ने अतिथि शिक्षक नियुक्त करने के निर्देश जारी किए हैं। इसमें शासकीय स्कूलों के शिक्षकों को सीएम राईज स्कूल लाया जाकर संबंधित शालाओं में अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति की जा सकती है। मगर अभी तक इसकी सुध नहीं ली जा रही है।
विभागीय आदेश रद्दी की टोकरी में
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार विभाग ने पोर्टल से जहां भी नियुक्ति में समस्या आ रही है, वहां विभागीय जिला संयोजक की देखरेख में समिति बनाकर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने को कहा है। शिक्षकों की रिक्ति वाले स्कूलों में वे सीएम राईज स्कूल भी हैं, जिनमें विश्वस्तरीय सुविधाएं देने का दावा किया गया था। सूत्रों का कहना है कि स्कूल शिक्षा एवं जन- जातीय कार्य विभाग द्वारा संचालित स्कूलों में लगभग 50 हजार से अधिक शिक्षकों के पद रिक्त पड़े हैं और ये दोनों ही विभाग सीएम राइज स्कूलों का भी संचालन करते हैं।
भवन बनाने में व्यस्त है विभाग
इनमें विभाग अभी शिक्षकों की कमी दूर नहीं कर पा रहे हैं। हां इनके सर्वसुविधायुक्त भवन बनवाने की तैयारी जोरशोर से जरूर की जा रही है। यही कारण है कि अभी सरकार विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस स्कूल बना रही है। स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों का जोर इन दिनों भवन निर्माण पर ज्यादा है। यदि उन्हें बच्चों के भविष्य की चिंता होती तो सीएम राइज जैसे स्कूलों में सत्र प्रारंभ होने से पहले ही अनुभवी शिक्षकों की व्यवस्था की जा सकती थी। दूरदराज के गांवों में वर्षों से पदस्थ नियमित शिक्षक इन स्कूलों में आना चाहते हैं। उन्हें लाकर ग्रामीण क्षेत्रों में अतिथि शिक्षक रखे जा सकते थे। इससे गांव के पढ़े-लिखे लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार भी मिल जाता और गांव में ही होने के कारण वे ठीक से पढ़ाते भी। बताया जाता है कि लगभग सभी सीएम राइज स्कूलों में ऐसे ही हालात हैं जिनमें वर्तमान शैक्षणिक सत्र 2023- 24 में भी शिक्षकों की कमी है।
रिक्तियों की जानकारी देने से परहेज
अलबत्ता स्कूल शिक्षा विभाग ने स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पदों की सूचना अभी तक सार्वजनिक नहीं की है। जबकि अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति भी इसी माह में की जानी थी। इससे सरकारी शिक्षा के मंदिर चाहे बन जाएं मगर वहां ज्ञान का प्रकाश मिलना मुश्किल है।
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