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Monday, 2 November 2026
खरगोन

अब सड़कों पर थमते नहीं पाँव, दुर्गम पहाड़ियों की ऊंचाइयों पर भी रुकते नहीं पहिए

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लुभावनी सड़कों के साथ विहंगम पुल भी किये निर्मित

खरगोन- मप्र शासन और भारत शासन द्वारा निर्मित सड़कों के माध्यम से आज हम जिले के किसी भी कोने में वाहनों से सरपट दौड़ते जा सकते हैं। चाहे राष्ट्रीय राजमार्ग से हो या लोक निर्माण विभाग की किसी छोटी सड़क की बात हो सभी ओर हम जिले की सीमा से महाराष्ट्र राज्य में भी प्रवेश कर सकते हैं। दरअसल वर्ष 2004 के बाद से जिले में सड़कों का जाल बुनना नए सिरे से प्रारम्भ हो गया था। जो आज जिला मुख्यालय से जिले के अतिदुर्गम गांव धूपा-धूपी हो या मेंढ़ल हो या मेंढागढ़ किसी भी राजस्व ग्राम तक पहुँचने की सुगम व्यवस्था कायम हो गई है। जो आज भी लगातार वन ग्रामों को राजस्व ग्राम घोषित कर प्रस्ताव बनाने की दिशा में अग्रसर है। आज जिले में सड़कों पर न तो पाँव थमते है और ना ही वाहनों के पहिये। सभी दूर सड़कें लिए जा रही है।

वर्ष 2004 के बाद प्रारम्भ हुआ था सड़कों का नया अध्याय

वर्ष 2004 के बाद से जिले में सड़कों का नया अध्याय प्रारम्भ हो गया था। जो आज की स्थिति में लगातार जारी है। 2004 से पूर्व लोक निर्माण एवं मप्र ग्रामीण विकास प्राधिकरण की 320.75 किमी. सड़कें निर्मित थी। जो आज पीडब्ल्यूडी, एमपीआरडीसी, पीएमजीएसवाई और एनएच की कुल 1189 सड़के निर्मित हुई है। जो कुल 3775.407 किमी. दूरी तय कराती है। इतना ही नहीं पीएमजीएसवाय के 64 पुल निर्मित किये गए जिनमें कुछ तो विहंगम स्तर के है। सिर्फ पीडब्ल्यूडी, एमपीआरडीसी और मप्र आरआरडीए विभाग ने 2004 से 2023 के बीच 1854.47 करोड़ की लागत से 1033.36 किमी. सड़कों का विस्तार किया। जिससें लगभग 826 गाँवों को मुख्य मार्गांे से जोड़ा गया। इसके अलावा आगे 199.55 करोड़ की लागत से 120.6 किमी. की सड़कों का विस्तार प्रस्तावित है।

पीएमजीएसवाय की 555 सड़कें 47185.55 लाख की लागत से बिछा 250 से अधिक आबादी वाले गाँवों में जाल

सड़कों के जाल की बात करते है तो प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना एक अतिमहत्वपूर्ण योजना साबित हुई है। इस योजना के माध्यम से जिले में कुल 555 सड़कें बनाई गई है। जो 2318.295 किमी.लंबी सड़कें 47184.55 लाख रुपये की लागत से बनी है। इस योजना में कुछ ब्रिज या पुल ऐसे हैं जो विहंगम साबित हो रहें है। विभाग) द्वारा 64 पुल 11689.84 लाख रुपये से बनाएं है। इस योजना से संपर्क विहीन 571 ग्रामों को पक्के मार्गाे से जोड़ा गया है।

पीडब्ल्यूडी, एमपीआरडीसी और एनएच की सड़कें भी पीछे नहीं

जिले में सड़कों का जाल बिछाने में पीडब्ल्यूडी, एमपीआरडीसी और एनएच विभाग भी पीछे नहीं है। पीडब्ल्यूडी की 222 सड़कें 955.01 किमी. की दूरी तय कराती है। एमपीआरडीसी विभाग की 11 महत्वपुर्ण सड़कें है जो जिले में तहसील मुख्यालयों के अतिरिक्त जिलों में भी ले जाती है। विभाग की 11 सड़कें कुल 422.512 किमी दूर तक जाती है। वहीं नेशनल हाइवे भी जिले से गुजर रहें है। जो खलघाट से सरवर देवला तक 79.59 किमी. तक बनाया गया है। इसके अलावा देशगांव से खरगोन व खरगोन से जुलवानिया तक अभी प्रस्तावित है। जिसके टेंडर आगामी समय में लगने की पूरी सम्भावना है।

कुछ महत्वपूर्ण दुर्गम पहाड़ियों तक पहुँचाने वाली सड़कें ये है

जिले में भगवानपुरा और झिरन्या ऐसे जनजातीय क्षेत्र है जो अत्यंत दुर्गम सुदूर क्षेत्र है। कई स्थान वनग्राम होने से कुछ समय अवरुद्ध रहा। लेकिन प्रशासन की दूरदृष्टि और शासन की नीति के कारण राजस्व ग्राम घोषित होने के बाद स्थितियों में बदलाव हुआ। इनमें मुख्य है धूपा से माँझल जाने वाली 13.13 किमी. की सड़क, धूपा से ही धूपी को जाने वाली 35.28 किमी. की सड़क,भगवानपुरा में देजला से बडिया 9.07 किमी. की सड़क,चौनपुर से गंलनपाटी की 5.40 किमी लंबी सड़क पीएमजीएसवाय द्वारा बिछायी गई।

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