शब्द और संगीत की प्रतिध्वनि का नाम है अनुनाद

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खंडवा- शब्द और संगीत की प्रतिध्वनि का नाम और अमूर्त परम सत्ता के लिए रचे गए शब्द और संगीत का महत्वपूर्ण दस्तावेज अनुनाद है। यह बात कविता में संगीत पर आधारित काव्य संग्रह अनुनाद संपादक विनय उपाध्याय पर    साहित्य संवाद खंडवा द्वारा आयोजित संवाद विमर्श में व्यंग्कार कैलाश मंडलेकर ने कही। अनुनाद में साहित्य और संगीत के अंतर्संबंधों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों अव्याखायित हैं।

पहले सत्र में अरुण सातले एवं गोविंद गुंजन ने अनुनाद से अपनी रचनाओं का पाठ किया।
द्वितीय सत्र में राजश्री शर्मा ने अनुनाद की कविताओं पर राग रागिनियों के माध्यम से विस्तृत चर्चा की। सुधीर देशपांडे ने संगीत की भाषा और शब्दों की सत्ता के दस्तावेज अनुनाद की चुनिंदा कविताओं के माध्यम से पुस्तक के केंद्रीय भाव को साझा करने का प्रयास किया। विशेषज्ञ टीप देते हुए शैलेंद्र शरण ने अनुनाद की भौतिक शास्त्रीय व्याख्या से आरंभ कर साहित्य और संगीत तक इसे विस्तार दिया।

तीसरे और अंतिम सत्र में श्रोताओं ने अनुनाद की कविताओं पर बेबाकी से विचार रखे। रघुवीर शर्मा ने विनय उपाध्याय के संपादन और संगीत दृष्टि की तारीफ करते हुए अनुनाद को साहित्य और संगीत का एक जरूरी दस्तावेज बताया। वनमाली सृजन पीठ के अध्यक्ष शरद जैन ने संगीत आधारित पुस्तकों की चर्चा करते हुए अनुनाद को संतोष चौबे के उपन्यास जल तरंग के तरह अनूठा कविता संग्रह निरूपित किया। संतोष तिवारी, मोरेश्वर राव मंडलोई, श्रीकांत साकल्ले, डा रश्मि दूधे, मंगला चौरे, डा कुलदीप सिंह फरे, श्याम सुंदर तिवारी एवम अन्य साहित्यकार इस अवसर पर मौजूद थे। संचालन, संयोजन वनमाली सृजन पीठ खंडवा के उपाध्यक्ष गोविंद शर्मा द्वारा किया गया।

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