हरदा जिले में औषधि विक्रेताओं की मनमानी, मांगने पर भी नहीं देते पक्का बिल

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अनोखा तीर, हरदा। जिले में औषधि विक्रेताओं की मनमानी चरम पर है। कोरोना संक्रमण काल में जब जनजीवन खतरे में था तब भी इन्होंने मानव धर्म त्यागकर जरूरतमंद लोगों को लूटने में कसर नहीं की थी। आज भी इनका यही रवैया जारी है।

औषधि विक्रय नियमों की अनदेखी

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार विभाग की मनमानी और मिलीभगत के चलते औषधि विक्रय के नियमोंं से खूब छेड़छाड़ हो रही है। यहां नियमों को ताक पर दवाओं की कई दुकानें तो किराए के लायसेंस पर चल रही हैं। जो मानव साथ सीधा खिलवाड़ है। नियमानुसार मेडिकल शॉप का संचालन करने का लायसेंस बी-फार्मेसी की डिग्री वाले को मिलता है और इन दुकानों का संचालन उनके द्वारा खुद की देखरेख में किया जाना चाहिए। मगर कई दुकान अपने भाई, पिता और चाचा के लायसेंस पर चल रही हैं। तो कुछ लोग दूसरों से मासिक किराए पर उनके लायसेंस दुकान चला रहे हैं। ऐसी स्थिति में उन्हें दवाओं के रखरखाव का ज्ञान नहीं है। इन दुकानों पर काम करने वाले कर्मचारियों की शैक्षिक योग्यता दसवीं-बारहवीं से अधिक नहीं है। इन्हें अंग्रेजी का सामान्य ज्ञान भी नहीं है। ऐसी स्थिति में डॉक्टरों के लिखे पर्चों को पढ़कर ये किस प्रकार सही दवा दे पाते हैं। यह सवालों के घेरे में है। ड्रग इंस्पेक्टर द्वारा समय-समय पर इनकी जांच की जानी चाहिए मगर यह नहीं की जाती है। इससे इन दुकानों पर मनमर्जी का राज चल रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सभी मेडिकल स्टोर से वसूली होने के कारण ड्रग इंस्पेक्टर भी यहां साल में एकाध बार बमुश्किल आता है। यहां वसूली हेतु किसी बंदे को नियुक्त कर रखा है।

बिना बिल के हो रहा कारोबार

संपूर्ण हरदा जिले में इन दिनों मेडिकल स्टोर मरीजों ग्राहकों को बिना विक्रय बिल के ही औषधियों का विक्रय कर रहे हैं। किसी भी ग्राहक मरीज को औषधियों के विक्रय बिल प्रदाय नहीं किये जा रहे हैं। दुकान में विक्रय बिल बुक का भी संधारण नहीं होता। जबकि ऐसी अनियमितता के मामले में अनुज्ञप्तिधारियों की फर्मों पर औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 नियमावली 1945 के तहत लायसेंस निरस्त करने की कार्यवाही की जा

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