गणेश पांडे, भोपाल। वित्त विभाग ने वन विभाग के 500 करोड़ से अधिक के बजट पर ब्रेक लगा दिया है। अब जंगल महकमे को कार्य योजना के क्रियान्वयन पर खर्च होने वाले बजट को लेकर वित्त विभाग से मिन्नतें करना पड़ रही है। इसके अलावा प्रशासन के सुदृढ़ीकरण और वन मानचित्र ओके डिजिटाईजेशन के कार्य पर भी असर पड़ रहा है। वित्त विभाग ने 31 मार्च 2023 एक सर्कुलर जारी कर 41 विभागों के बजट सशर्त रिलीज करने के फरमान जारी किया है। वित्त विभाग के फरमान के बाद से वन विभाग में लेबर ओरिएंटेड पौधारोपण जैसे कार्य प्रभावित हो रहे हैं। मैदानी फील्ड अफसरों के पास श्रमिकों के भुगतान से लेकर अन्य भुगतान करने के लिए बजट नहीं है। जबकि विभाग के मुखिया का दबाव है कि बजट के अभाव में पौधारोपण कार्य प्रभावित न हो। डीएफओ से लेकर सीसीएफ तक बजट के लिए प्रधान मुख्य वन संरक्षक मुख्यालय को लगातार चिट्टियां लिख रहें हैं। दिलचस्प पहलू यह है कि फील्ड के अफसरों को न तो कोई दिशा-निर्देश मिल रहे हैं और न ही बजट। सीनियर अफसरों द्वारा सिर्फ पौधारोपण के कार्य कराने जाने के फरमान जारी किए जा रहे हैं।
किस मद में कितना बजट
7882 मद 508 करोड़ कार्य योजनाओं का क्रियान्वयन
2330 मद 25 करोड़ वन मानचित्रों का डिजिटाईजेशन
2723 मद 20 करोड़ प्रशासन सुदृढ़ीकरण
राज्यपाल गुरुवार को करेंगे समीक्षा
राज्यपाल मंगू भाई पटेल पहली बार गुरुवार को वन विभाग द्वारा संचालित सभी योजनाओं और बजट के उपयोग को लेकर समीक्षा करने जा रहे हैं। समीक्षा करने से पहले पटेल ने वन विभाग की योजनाओं और उस पर अब तक किए गए खर्च का ब्यौरा मांगा है। पिछले दो दिनों से प्रधान मुख्य वन संरक्षक मुख्यालय का अमला समीक्षा की तैयारियों में जुटा हुआ है। इसके अलावा राज्यपाल वन ग्राम से राजस्व ग्राम बदलने के क्रियान्वयन, पेसा एक्ट, तेंदूपत्ता बोनस और अन्य योजनाओं को लेकर भी समीक्षा करने जा रहे हैं।
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