अनोखा तीर, हरदा। प्रदेश में बाल मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष स्वास्थ्य एवं महिला-बाल विकास विभाग के समन्वय से दस्तक अभियान चलाया जाता है। वर्ष में 2 बार अधिकतम 6 माह तथा न्यूनतम 4 माह के अंतराल में यह अभियान चलाया जाता है। इसके प्रथम चरण में 5 वर्ष आयु तक बच्चों की चिकित्सीय जांच कर बीमारियों की पहचान एवं त्वरित उपचार पर बल दिया जाता है। यह अभियान जिले में 18 जुलाई 2023 से 31 अगस्त 2023 तक चलाया जाएगा। इसमें 0 से 5 वर्ष के बच्चों की स्क्रीनिग कर उनका समुचित उपचार किया जाएगा। जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एचपी सिंह ने बताया कि दस्तक अभियान में स्वास्थ्य एवं महिला बाल विकास विभाग के संयुक्त दल द्वारा एएनएम, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता द्वारा घरोंघर दस्तक देकर प्रत्येक बच्चे की जांच की जाएगी। इसमें निमोनिया पीड़ित बच्चों की जांच, इलाज, कुपोषित की जांच व पोषण पुनर्वास केन्द्र में भर्ती करने, दस्त व डायरिया से पीड़ित बच्चों के पालको को ओआरएस घोल बनाने की जानकारी दी जाएगी।
टीमों का किया गठन
इस अभियान में चयनित बच्चों को प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र रिफर भी किया जाएगा। जहां मेडिकल ऑफिसर उनके उपचार की व्यवस्था करेंगे। डॉ. सिंह ने बताया कि इस बारे में अंतर्विभागीय बैठक का आयोजन किया जा चुका है। इस अभियान के लिए ग्रामीण स्तर तक सभी तैयारी पूर्ण कर ली हैं। उन्होंने बताया कि जिन वनांचल क्षेत्रों में स्वास्थ्यकर्मी पदस्थ नहीं है वहां पर वैकपिक व्यवस्था कर ली गई है। कार्यक्रम की निगरानी हेतु जिला, ब्लाक एवं सेक्टर स्तर पर टीम का भी गठन कर लिया गया है। यह टीम निरंतर भ्रमण कर सतत निगरानी करेंगे, ताकि कोई भी बच्चा स्वास्थ्य सुविधा के लाभ से वंचित न रहे।
67 हजार का लक्ष्य
डॉ. सिंह ने बताया कि जिले को दस्तक अभियान में लगभग 67 हजार 629 बच्चों का लक्ष्य मिला है। इसमें 87 प्रतिशत बच्चों का डिजीटाईजेशन किया जा चुका है।
प्रशिक्षण दिया
जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. शैलेन्द्र परिहार ने बताया कि जिले में सभी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। हर घर पर दस्तक अभियान के तहत मार्किंग की जाएगी ताकि निरीक्षण दल कार्य का सत्यापन कर सके।दस्तक दल द्वारा इस अभियान में 11 प्रमुख गतिविधियॉ संचालित की जाएगी। इसमें समुदाय में बीमार नवजात शिशुओं और बच्चों की पहचान, प्रबंधन एवं रेफरल, 5 वर्ष से कम उम्र के गंभीर कुपोषित बच्चों की सक्रिय पहचान, रेफरल एवं प्रबंधन किया जाएगा। इसके अलावा 6 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों में गंभीर एनीमिया की सक्रिय स्क्रीनिंग एवं प्रबंधन, 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में बाल्यकालीन दस्त रोग की पहचान एवं नियंत्रण हेतु ओआरएस एवं जिंक के उपयोग संबंधी सामुदायिक जागरूकता में बढ़ावा एवं प्रत्येक घर में गृहभेंट के दौरान ओआरएस पहुंचाना शामिल है।
पखवाड़े का आयोजन
इस अभियान दौरान सघन दस्त रोग पखवाड़ा आयोजित किया जाएगा। इसमें आईडीसीएफ गतिविधि आयोजित की जाएंगी। इसमें 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में शैशव एवं बाल्यकालीन निमोनिया की त्वरित पहचान, प्रबंधन एव रेफरल, 9 माह से 5 वर्ष तक के समस्त बच्चों को विटामिन-ए अनुपूरण बच्चों में दिखाई देने वाली जन्मजात विकृतियों एवं वृद्धि विलंब की पहचान, 5 वर्ष तक आयु वाले बच्चों में श्रवणबाधिता, दृष्टिदोष की पहचान पुष्टि कर आरबीएसके कार्यक्रम में पंजीयन कर उपचारित कराना, समुदाय को समुचित शिशु एवं बाल आहारपूर्ति संबंधी समझाईश, एसएनसीयू एवं एनआरसी से छुट्टी प्राप्त बच्चों में बीमारी की स्क्रीनिंग तथा फॉलोअप को प्रोत्साहन, गृहभेंट दौरान आंशिक रूप से टीकाकृत एवं छूटे बच्चों की टीकाकरण स्थिति की जानकारी ली जाएगी।

