अनोखा तीर, हरदा। जिला मुख्यालय सहित सभी तहसील मुख्यालयों और नगरों में बिकने वाले फल आपके सेहत को फायदा पहुंचाने के स्थान पर नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। इन दिनों शहर के बाजार में जो फल बिकने आए हैं, उनकी गारंटी नहीं है कि वे नेचुरूल रूप से पके हैं या रसायन से। ज्ञात हो कि रसायन के प्रयोग का चलन अब कच्चे फलों को समय से पहले पकाने और स्वादिष्ट बनाने में होने लगा है। यह समय के पहले पक तो जाते हैं, मगर पतिक रूप से पके फलों की तुलना में स्वास्थ्यवर्द्धकभी नहीं हैं। बहरहाल इसकी शिकायतें लंबे समय से की जाती रही है किंतु कोई नतीजा नहीं हुआ। इस कारण बाजार में बिक रहे अधिकांश फल पेड़ों पर पके होने के स्थान पर इन्हें कुछ रासायनिक दवाओं से पकाया गया है। केले, आम, अमरूद इत्यादि फल ऐसे हैं जिन्हें पेड़ों पर प्राकृतिक रूप से पकना चाहिए। मगर बगीचे वालों से ठेका लेकर इन्हें तुड़वाने वाले ठेकेदार इसका इंतजार नहीं करते। इस तरह बगीचों से टूटकर गोदाम में पहुंचे बलों की खतरनाक रासायनिक पदार्थों से तीमारदारी की जाती है। नतीजन वे पककर तैयार तो हो जाते हैं मगर प्राकृतिक मिठास खत्म होने के साथ जहरीले भी हो जाते हैं। इस तरह के पके फलों की जांच कर इन्हें बाजार से बाहर किया जाना चाहिए अन्यथा ये मानव और तमाम जन-जीवन के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं।
नहीं होती समय पर जांच
बीते लंबे समय से यह देखने में आया है कि जिले में खाद सुरक्षा विभाग द्वारा समय पर इसकी जांच नहीं की जा रही है। कब कहां सैंपल बनाए, कितने जगह अमानक खाद्य सामग्री नष्ट कराई इसकी को हलचल बाजार में न दिखाई देने से, विक्रेताओं के हौंसले बुलंद हैं। यही वजह है कि बाजार से ऐसी अमानक खाद्य सामग्री लेकर आने वाले लोग नित नई व्याधियों का शिकार होने लगे हैं।
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