विकास पवार बड़वाह – इंदौर ने भले स्वच्छता में 6 बार छक्का लगाया हो । मगर आज वही इंदौर ठगी की गंदगी में नही उभर पाया है ।जबकि ऐसी घटना भी किसी आम रईस खानदानी के साथ नहीं,बल्कि ऐसे गरीब के साथ हुई, जो अपने जीवन को बचाए रखने के लिए गंभीर बीमारियों से जूझ रहा हैं ।जो करीब 14,15 सालो से आज भी अस्पतालों के चक्कर लगाकर डायलिसिस करवा रहे हैं।यह ठगी का शिकार डायलिसिस मरीज रवि खांडे हुआ ,जो बड़वाह के समीप ग्राम बफलगांव का निवासी हैं । उनके हाथ में डायलिसिस करवाने के लिए पूरे समय रक्त चढ़ाने वाली बॉटल चढ़ाने की व्यवस्था रहती हैं । जब वे टी चोइथराम हॉस्पिटल से अपने दवा गोली ले कर बाहर निकल रहे थे ।तभी वहा इंदौर के ठगी सुनील जो कि किसी मेलकुंडी का होना बता रहा था ।जिसने अपनी मीठी बातों के जाल में उलझाकर रवि की हेपेटाइटिस बी की डायलिसिस की समस्या को दवा गोलियों और लेप के माध्यम से हमेशा के लिए ठीक करने का दावा कर दिया । चूंकि रवि खांडे विगत कई वर्षों से अपनी हेपेटाइटिस बी की डायलिसिस को लेकर काफी परेशान हो चुका है । जिसके लिए यह प्रयास उसके जीवन बचाने में कारगार साबित होने जैसा था ।

45 हजार की दवाइयों का भी मरीज को नही हुआ कोई असर —-
अपने जीवन को बचाने की सोच के साथ रवि उस व्यक्ति के जाल में फसकर उसके साथ इंदौर के ओल्ड पलासिया पर किसी तुलसी आयुर्वेदिक मेडिकल दुकान पर गया । जहां पूरी मेडिकल की दुकान दवाइयों से सजी थी ।जिसे देख कोई यह नहीं सोच सकता कि इतनी बड़ी मेडिकल की दुकान मात्र ठगी की गंदगी के लिए सजाई गई है । उन्हें वहां लगभग 45 हजार की दवाओं का डोज दिया गया । इस दौरान रवि के मोबाइल से ऑनलाइन और कुछ जेब में जो नगद रुपए थे वह लगभग 33 हजार रुपए ही उसे अदा कर पाया और शेष 12 हजार की राशि अगली बार आकर देने का उसने आश्वासन दिया ।जिसके बाद इन दवाइयों का इस्तेमाल रवि ने निर्धारित समय की अवधि तक किया ।इसके बावजूद दवाइयों से कुछ लाभ नहीं हुआ।हालाकी यह दवाई खाने की नही शररी पर लगाने के लिए दी गई थी ।लेकिन जब दवाई का असर नहीं हुआ और रवि ने संबंधित व्यक्ति से मिलने के बहाने जब मोबाइल पर दोबारा दवाइयां लेने आने का उस व्यक्ति से कहा ।लेकिन जब रवि दोबारा इंदौर गया,उन्हें उम्मीद थी कि वह व्यक्ति और मेडिकल दुकान मिल जाएगी ।लेकिन रवि के जीवन बचाने के अरमानों पर उस समय पानी फिर गया। जब उक्त स्थान पर मेडिकल दुकान का कोई नामोनिशान नहीं दिखा । जिनके फोन नंबर उनके पास थे, वह भी बंद आए । किसी ने फोन नही उठाया । इन गतिविधियों से रवि को ठगी होने का अहसास हुआ ।उल्लेखनीय है की उनकी बीमारी का नाजायज फायदा उठाकर ठगी कर उनसे पैसे ऐठे लिए गए । जिसके बाद रवि ने तब तुकोगंज थाना इंदौर पर इसी ठगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई । जहा रवि से आवेदन लेकर कार्रवाई करने का आश्वासन देकर उन्हें लौटा दिया गया । इंदौर की जागरूक जनता को चाहिए कि वह इंदौर के लगभग हर अस्पतालों में इस तरह के ठगी गिरोह पर खुफिया नजर रखें । उन्हें पकड़े और उचित सजा दिलाने की उचित व्यवस्था करें । इंदौर की जिम्मेदार पुलिस, प्रशासन,जनप्रतिनिधि और अस्पतालों को भी इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता है । कि उनके सेवा संकल्प के बाहर किस तरह से लोगों को लूटा जा रहा है।
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