जब हम माता-पिता को नहीं बदल सकते है तो धर्म को कैसे बदल सकते हैं- शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती

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धर्म के संबंध में अश्लीलता परोसने वाली फिल्मों को स्वीकृति नहीं देना चाहिए

खंडवा। आदिपुरुष फिल्म के रिलीज के बाद से ही देशभर में बैन करने की मांग उठ रही है। फिल्म को लेकर विवाद तेज हो गया है। खंडवा पहुंचे जगदगुरू शंकराचार्य शारदा मठ द्वारका के पीठाधीश्वर स्वामी सदानंदजी सरस्वती महाराज ने लव जिहाद, धर्मांतरण, गोहत्या सहित रामायण आधारित विवादित बन चुकी आदिपुरूष फिल्म पर भी अपने विचार रखे। पत्रकारवार्ता के दौरान उन्होंने कहा, अनैतिक लोग धनार्जन करने के लिए नैतिक संदेश प्रचार करने का प्रयास करते हैं। जहां स्वयं ही नैतिकता सिद्ध नहीं है, उनसे हमारे बालक क्या सीखेंगे। समाज, जागरूक लोगों और शासन की जिम्मेदारी है, वे ऐसे चलचित्र दिखाने की अनुमति ही क्यों देते हैं। जिनमें धर्म के संबंध में अश्लीलता परोसी जा रही है। ऐसी फिल्मों को स्वीकृति ही नहीं देना चाहिए।

स्कूल और कॉलेजों में धर्म की शिक्षा प्रदान की जाए

शंकराचार्य ने कहा, प्राणी मात्र के कल्याण का विधान जिस संविधान में हो। उसके लिए भारत में निवास करने वालों के लिए एक ही देश में एक सा कानून हो। समान लोगों के लिए समान विधान हो। स्कूल और कॉलेजों में धर्म की शिक्षा प्रदान की जाए। इसके लिए संविधान में नियम होना चाहिए। यदि नियम नहीं होता है तो संविधान की धारा 28 और 31 ए, दोनों अलग कर दें, अपने-आप धर्म का प्रचार होने लगेगा। स्कूली शिक्षा में जैसे गणित और विज्ञान के विषय पढ़ाए जाते है। वैसे ही पाठ्यक्रम में धर्म के विषय जोड़े जाए। क्योंकि, बालकों का ह्रदय कोमल होता है। गिली मिट्टी की तरह होता है, इनमें कोई भी खिलौना बना सकते है। मिट्टी कठोर हो जाती है तो कोई खिलौना नहीं बन सकता। इसलिए आप बाल्यावस्था में जो धर्म ज्ञान देंगे, वो संस्कार बनेगा। इसी तरह बच्चों का अंत: करण होता है।

सेवा के नाम आ रहे विदेशी धन की जांच होना चाहिए

धर्मांतरण को लेकर शंकराचार्य ने बड़ी बात कहते हुए कहा कि, कुछ लोग प्रलोभन में इसलिए आते है, क्योंकि उनके पास अभाव है। उस अभाव की पूर्ति हम लोग कर दें तो धर्मांतरण ही नहीं होगा। बड़े-बड़े लोग, अरबपति, करोड़पति लोग तो इन गरीबों को कहा कुछ देते है। जिसके पास सबकुछ होता है, हम लोग उसी समुद्र को ही देते है। जिन स्थानों पर देना चाहिए, वहां देना चाहिए।
दूसरी बात यह कि, सेवा के नाम पर विदेशों से जो धन आ रहा है, उसकी जांच होना चाहिए। वह सेवा में खर्च हो रहा है या धर्म परिवर्तन में। भारत सरकार तो ऐसे मदर टेरेसा वाले के लिए आने वाले विदेशी फंड पर आयकर में शत-प्रतिशत छूट देती है। जबकि भारत देश के भीतर एनजीओ और संस्थानों मात्र 25 फीसदी छूट है।

लव जिहाद धर्म परिवर्तन करने का षडयंत्र

तीसरा यह कि, जब हम माता-पिता को नहीं बदल सकते है तो धर्म को कैसे बदल सकते है। ऐसे क्षेत्रों में जाना चाहिए। धर्म सास्वत है। धर्म में कोई परिवर्तन नहीं किया जाता है। हम अपना रक्त नहीं परिवर्तित कर सकते है। हमें अपनी संस्कृति और संस्कारों में परिवर्तन नहीं करना चाहिए। यह बात अभावग्रस्त लोगों को बताना चाहिए। धर्म बदलने के दौरान उनके साथ छल होता है। कानून का सहारा लेंगे तो कोर्ट में सिद्ध करना मुश्किल हो जाता है। इसलिए जागरूकता ही उपाय है। आगे लव जिहाद को लेकर कहा कि, यह तो कुछ नहीं है। यह धर्म परिवर्तन करने का षडयंत्र है। प्रेम करना तो कोई दोष नहीं है। राधा जी ने श्रीकृष्ण से, मीरा जी ने द्वारकाधीश जी से किया। ये लोग श्रद्धा पैदा करके श्रद्धेय बदल रहे है। पहला साधन, दूसरा साध्य और तीसरा साधक होता है। वे लोग साध्य को पकड़कर साधक बदल रहे है। हमारी बिटिया को प्रेमजाल में फंसाते है, दो-तीन साल तक तो वह धर्म छुपाकर रखता है। जब उसके घर ले जाता है, तब बिटिया को पता चलता है कि लड़का तो हमारे धर्म का नहीं है। शंकराचार्य शहर में विभिन्न आयोजन में शामिल हुए। पत्रकारवर्ता के दौरान अखिलेख गुप्ता, सुनील जैन व नारायण बाहेती उपस्थित थे।

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