शिव की महिमा….
अनोखा तीर, हरदा। जा पर कृपा राम की होइ, ता पर कृपा करे सब कोई राम चरित मानस की ये पंक्तियां एक छोटे किसान के घर-परिवार में चरितार्थ होते दिख रही है। दरअसल, करीबी ग्राम केलनपुर में रहने वाले गुर्जर समाज के राधेश्याम आंजने के घर में बेलपत्र का एक पेड़ है, जो इन दिनों ग्रामवासियों समेत पड़ोसी गांव के लोगों की आस्था का केन्द्र बन गया है। इसका मुख्य कारण विगत दो महिने से बेलपत्र के पेड़ के आसपास नित नए चमत्कार या यूं कहें कि प्रभु की लीलाएं देखने को मिल रही हैं। इसी सप्ताह अमावस्या के रोज बेलपत्र की जड़ के पास मिट्टी का प्राकृतिक शिवलिंग बन गया है, जिसके ठीक ऊपर मोगरे के फूल बराबर घी जैसा तरल तत्व दिख रहा है। इसके अलावा बेलपत्र के पेड़ से चंदन की खुशबू , दीपक की ज्योत, बॉटल में से नर्मदा जल उफनना सहित अन्य चमत्कार ग्रामवासियों की आस्था को बल मिल रहा है। साथ ही स्थल की महत्वता बढ़ने के साथ-साथ वहां नियमित पूजा-पाठ का दौर भी शुरू हो गया है। इतना ही नही, धर्मप्रेमीजनों को यहां पहुंचकर खास अनुभूति का आभास हो रहा है। इस संबंध में पूर्व सरपंच रामविलास पटेल ने बताया कि केलनपुर के राधेश्याम आंजने के घर पर लगे बेलपत्र के पेड़ के नीचे भगवान भोलेनाथ की महिमा देखने को मिल रही है। बेलपत्र की पत्तियों पर ओम आकार तथा त्रिशूल जैसी आकृति दिख रही है। मिट्टी का प्राकृतिक शिवलिंग बनने के बाद से आंजने परिवार व ग्रामवासी पूजा-पाठ में तल्लीन हो गए हैं।
गौमाता बनी चैतन्यता का माध्यम
ग्रामीण बताते हैं कि स्थान की महत्वता महिनें दो महिनें पहले प्रकाश में आई। इससे पहले राधेश्याम का परिवार बेलपत्र के पेड़ के पास गाय को बांधता था। जिसके चलते गाय बेलपत्र की पत्तियों को प्रभावित करती थी। कई दफा पत्तियां चबाने के चक्कर में छोटे से पेड़ को अस्त-व्यस्त कर देती थी। इस बात से चिंतित राधेश्याम ने गाय का स्थान बदलकर थोड़ा दूर बांधना शुरू कर दिया। उसके कुछ समय बाद गाय ने बछड़े को जन्म दिया। लेकिन गाय ने मालिक को जरा दूध नही दिया। इसके दूसरे दिन भी यही हाल रहा। तभी राधेश्याम ने इस बारे में अन्य लोगों से चर्चा की। वे भी स्वस्थ गाय को देखकर उसके दूध नही देने का कारण समझ नही सके। कुछ दिन रूकने के बाद भी जब गाय पटरी पर नही लौटी तो गाय को किसी ओर के सुपूर्द करने की ठान ली और दो-चार दिन में उसे एक अन्य ग्रामीण को सौंप भी दिया। जिसने घर ले जाकर सबसे पहले गाय की पूजा की। वहीं प्राय: सभी मवेशियों की भांति उसकी सेवा शुरू की। शाम को वही गाय बगैर किसी झंझट के दूध दे रही थी। सबकुछ सहज तरीके से होता देख गाय के नए मालिक ने राधेश्याम को इस बात की खबर की। जिसके बाद राधेश्याम हर एक पहलु पर गंभीरता से सोच डूब गया। इस दौरान उसे केवल और केवल यही बात अटक रही थी कि गाय को बेलपत्र के पेड़ के पास बांधते थे, जो उसकी पत्तियां खा जाती थी। बस यही वह दिन था, जबसे राधेश्याम का परिवार घर में लगे बेलपत्र के पेड़ को मुख्य पूजा स्थल के रूप में संवारने लगा, वहीं दीया-बत्ती के साथ-साथ नियमित पूजन प्रारंभ कर दी है। राधेश्याम के मुताबिक जबसे उस स्थान पर पूजा-पाठ शुरू की है, तबसे प्रभु की नई-नई लीलाओं के साक्षात दर्शन हो रहे हैं।
बेलपत्र का पेड़ किया सुरक्षित
अब घर के उस हिस्से को नेट से सुरक्षित कर दिया गया है। वहीं पेड़ से गिरने वाली पत्तियां उड़कर यहां-वहां ना पहुंचे, इसके लिये जमीन पर अखबार और थाली रखी जाती हैं। ग्रामीण के मुताबिक कुछ दिन पहले पेड़ की सारी पत्तियां मुरझा गई थी, तभी से स्थान पर स्नान कर प्रवेश तथा खास महिलाओं के लिए अलग नियम बनाया है। इसके पीछे मंशा यह कि पेड़ पर अस्वच्छ परझाई ना पड़े।
पुत्र को मिली अपेक्षाकृत उन्नति
रामविलास पटेल ने बताया कि प्रभु की कृपा से परिवार में खुशियों का संचार हुआ है। जबकि राधेश्याम आंजने के एक लघु सीमांत किसान हैं। उनका पुत्र प्रायवेट कंपनी में जॉब करता है। जिसे हाल ही में दूसरी कंपनी ने पहले से अधिक राशि का पैकेज ऑफर किया है। पुत्र को मिली उन्नति पर उसके माता-पिता का कहना है कि हम सबका जैसा सपना था, वह साकार हुआ है।
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