खंडवा :- संपूर्ण देश भर में संचालित होने वाले सरस्वती शिशु मंदिरों में एक जैसी वंदना प्रार्थना होती है, जिसका एक निश्चित क्रम होता है। इसमें या कुंदेंदु तुषार हार धवला जिसे हम वंदना कहते हैं, इसे गाते हुए मां शारदा के गुणों का बखान करते हैं एवं हे हंस वाहिनी ज्ञान दायिनी अंब विमल मति दे जिसे हम प्रार्थना कहते हैं, इसे गाते हुए इसमें हम मां सरस्वती से भारत को जग सिरमौर बनाने के लिए कुछ गुण मांगते हैं, जिससे हम लव, कुश, ध्रुव, प्रहलाद, सीता, सावित्री समान बन सके। यह बात विद्या भारती मालवा द्वारा सरस्वती विद्या मंदिर कल्याण गंज में चल रहे दस दिवसीय आचार्य दक्षता वर्ग में शिक्षक प्रशिक्षार्थियों को विद्या भारती की वंदना एवं प्रार्थना विषय पर प्रबोधन करते हुए विद्या भारती मालवा नगरीय शिक्षा के सह प्रांत प्रमुख सुंदरलाल जी शर्मा ने कही।
प्रचार प्रमुख अंतिम वर्मा ने बताया कि संवाद सत्र में वर्ग के बौद्धिक प्रभारी अनिल शर्मा द्वारा सरस्वती माता पर लिखा एवं कंपोज किया हुआ व्यक्तिगत गीत का गायन भी हुआ। इसके पश्चात दोपहर कालीन विमर्श सत्र में सरस्वती विद्या प्रतिष्ठान मालवा के प्रादेशिक सचिव प्रकाशचंद्र धनगर ने उपस्थित प्रशिक्षार्थियों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति आधारित आचार्य की संकल्पना विषय पर चर्चात्मक प्रबोधन किया। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का परिचय, संबंधित विषय का अपडेट ज्ञान, 360-डिग्री मूल्यांकन, शैक्षिक टूल्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आईसीटी, इंटर एंड मल्टीडिसीप्लिनरी अप्रोच, एक्सपीरियंशियल लर्निंग, लर्निंग आउटकम, आर्ट/कल्चर एंड गेम्स इंटीग्रेशन के साथ गतिविधि आधारित शिक्षण, बाल एवं शिक्षा मनोविज्ञान, भारतीय ज्ञान परंपरा, 21 वीं सदी के जीवन कौशल इत्यादि बिंदुओं पर चर्चा की। सत्र का संचालन एलटीएम प्रमुख मनीष सोनी ने किया। इस अवसर पर प्रधानाचार्य वर्ग संयोजक महादेव यादव एवं दक्षता वर्ग संयोजक राकेश जोशी उपस्थित रहे।
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