अनोखा तीर, हरदा। समर्थन मूल्य पर ग्रीष्मकालीन मूंग व उड़द की खरीदी से पहले प्रारंभ होने वाला पंजीयन कार्य अब तक अधर में है। जबकि, क्षेत्रीय विधायक एवं प्रदेश के कृषि मंत्री कमल पटेल 8 मई से पंजीयन शुरू करने की बात कह चुके हैं। साथ ही संबंधित विभाग के अफसरों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी प्रदान किए थे। परंतु अफसरों ने श्री पटेल के निर्देशों को गंभीरता नही दिखाई है। यही कारण है कि 8 मई से शुरू होने वाले पंजीयन कार्य का 11 मई तक कोई अता-पता नही है। जिसके चलते मुख्यालय समेत ग्रामीण क्षेत्रों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। वहीं किसानों के बीच कहीं ना कहीं यह लेटलतीफी उनकी चिंता में तब्दील हो रहा है। यहां बताना होगा कि इस संबंध में कृषि मंत्री कमल पटेल का बयान समाचार-पत्रों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी वायरल है। हालांकि, इसका उद्देश्य गांव-गांव पंजीयन शुरू होने की तारीख को साझा करना था। हुआ भी कुछ ऐसा ही, ये संदेश दूरदराज के गांव व मजरे-टोले तक पहुंच गया और वे पंजीयन के लिये 8 मई का इंतजार करने लगे। किंतु , पहले-दूसरे दिन यानि 8 और 9 मई को कई किसानों को पंजीयन के बजाय निराशा हाथ लगी। क्योंकि किसानों को पंजीयन कराएं बगैर वापस लौटना पड़ा। स्थिति यह है कि किसान अब यहां-वहां संपर्क साधकर पंजीयन शुरू हुये या कबसे शुरू करोगे ? जैसे सवालों के जबाव ढूंढ़ रहे हैं। इधर, पंजीयन कराने के लिये सैकड़ों किसान हर रोज मुख्यालय पर पहुंच रहे हैं। लेकिन तीन दिन बाद भी उनका पंजीयन नही हुआ है।
११ दिन का समय, 3 दिन यूं ही बीतें
किसानों की चिंता की मुख्य वजहों में यह भी शामिल है कि मूंग और उड़द का पंजीयन कराने के लिये 8 मई से प्रारंभ होने वाले पंजीयन कार्य की अंतिम तिथि 19 मई निर्धारित की है। इस लिहाज से पंजीयन के लिये केवल 11 दिन का समय मिला। जिसमें से 3 तीन यूं ही बीत गए। शेष 8 दिनों में शत-प्रतिशत पंजीयन किसी भागमभाग से कम नही होगी।
32 जिलों में मूंग व 10 जिलों में उड़द
कृषि विभाग से जारी आंकडो के अनुसार प्रदेश के 32 जिलों में मूंग का रकबा अपेक्षाकृत है। जबकि उड़द की खेती 10 जिलों तक सीमित है। इन 42 जिलों में समर्थन मूल्य की खरीदी प्रस्तावित है। इसमें हरदा जिला भी शामिल है। ऐसे में कछुआ चाल चल रहे पंजीयन कार्य को रफ्तार दिए जाने की जरूरत है।
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