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अनोखा तीर, हरदा। प्रदेश के वन कर्मचारियों ने अपनी 21 सूत्रीय मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है। ये सभी वन कर्मचारी आगामी 6 मई से सभी बेमुद्दत हड़ताल पर चले जाएंगे। इसके पहले वे अपनी-अपनी बंदूकें, बस्ते आदि विभागीय कार्यालय में जमा कराएंगे। ज्ञात हो कि इनकी मांगें लंबे समय से विचाराधीन हैं। इन पर आज तक कोई सुनवाई न होने से विभाग का मैदानी अमला नाराज है। यदि यह हड़ताल पर चले गए तो हमारी करोड़ों की वन संपदा को क्षति होने की आशंका है।
क्या है मांगें
प्रदेश के वन कर्मचारियों की प्रमुख मांग यह है कि उन्हें शासन की पुरानी पेंशन योजना का लाभ दिया जाए। वन विभाग में कार्यरत सभी वर्ग के लिपिक, निज सहायक और वरिष्ठ निज सहायक का वेतनमान मंत्रालय में कार्यरत लिपिकों के समान किया जाए। कर्मचारियों की पदोन्नति पुलिस, राजस्व विभाग के समान या उच्च पद के प्रभार दिए जाने के आदेश दिए जाएं। वनरक्षक को बीट परिसर में एवं अन्य शासकीय कार्यों में आने-जाने के लिए फिक्स टीए निर्धारित किया जाकर भुगतान किया जाए। इसी प्रकार वनरक्षक के समयमान वेतनमान के आदेश जारी करने 22 हजार वनरक्षकों एवं उनसे पदोन्नत वनपाल एवं उप वन क्षेत्रपाल को लाभ देने के साथ ग्रेड-पे बढ़ाया जाए। राजस्व एवं पुलिस के समान वेतनमान और 13 माह का वेतन करने, वन कर्मचारियों को सशस्त्र बल घोषित करने के लिए आईपीसी एवं सीआरपीसी में संशोधन करने, न्यायिक मजिस्ट्रेट के अधिकार देने, वनकर्मियों को महाराष्ट्र सरकार की तर्ज पर पांच हजार रुपए वर्दी भत्ता प्रदान करने, 13 माह का वेतन, पौष्टिक भत्ता, नक्सलाइट क्षेत्र में कार्य करने वाले कर्मचारियों को भत्ता एवं टाइगर रिजर्व की बीटों में दो वनरक्षकों की पदस्थिति करने की मांगें प्रमुख हैं। इसके अलावा सभी कर्मचारियों की सेवा को तकनीकी सेवा घोषित की जाए। शहीदों के समान परिवार के सदस्यों को एक करोड़ रुपए की राशि और अन्य सुविधाएं प्रदान की जाए।
आंदोलन में ये शरीक होंगे
इस आंदोलन में जंगलों, अभ्यारण्यों समेत विभागीय कार्यालयों के 5600 स्थाईकर्मी, 12000 वनरक्षक, 550 वनपाल, 700 उपवन क्षेत्रपाल और 1192 वन क्षेत्रपाल शामिल होंगे। वनकर्मियों ने वर्ष 2008, 2011 और 2018 में भी आंदोलन किया था। इस दौरान सरकार ने बुलाकर बातचीत कर मांगे पूरी करने का भरोसा दिलाते हुए समझौता किया था। मगर इन तीनों समझौतों का उल्लंघन किया। इस कारण संघ ने मजबूर होकर चरणबद्ध आंदोलन करने का निर्णय लिया है। आगामी समय में बड़े स्तर पर आंदोलन किया जा रहा है।
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