– कांग्रेस के किसान सम्मेलन में सरकार पर जमकर बोला हमला
-सम्मेलन में जिले भर से बड़ी संख्या में पहुंचे किसान
अनोखा तीर, हरदा। बड़े-बड़े मंचो से खुद को किसानों का सच्चा हितैषी बताने वाली भाजपा सरकार विधानसभा में किसानों के हक-अधिकार की बात आई तो सत्तापक्ष ने चुप्पी साधे रखी। सदन में मैंने केवल इतना समर्थन मांगा कि किसानों को उनके गेहूं का वाजिब दाम 3 हजार रुपए क्विंटल करने की जरूरत है। ये बात सत्तापक्ष के गले नही उतरी। इसी मुद्दे को लेकर अब कांग्रेस प्रत्येक जिले में किसानों के बीच जा रही है। यदि कांग्रेस की सरकार बनती है तो किसानों का समर्थन मूल्य पर गेहूं ३ हजार रुपए क्विंटल खरीदा जाएगा। यह बात पूर्व कैबिनेट मंत्री जीतू पटवारी ने स्थानीय वीर तेजाजी चौक पर आयोजित कांग्रेस के किसान सम्मेलन में कही। साथ ही इस बात पर जोर दिया कि मैं खुद दलगत राजनीति से ऊपर उठकर किसानों को उनकी उपज का वाजिब दाम मिले, इसका पक्षधर हूं। क्योंकि यही किसान खेत में अन्न उगाता है, जो पूरे देश का पेट भरता है। किसानों की ही संतान बार्डर पर तपती दोपहरी हो चाहे कड़कड़ाती ठंड देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं। उन्हीं की वजह से पूरा देश सुरक्षित वातावरण में सांस ले रहा है। इतना ही नही, कोरोनाकाल में जिन करोड़ों परिवारों को राशन मुहैया कराने का सरकार दम भरी है, वह भी किसानों की ही देन है। ऐसे में केन्द्र व राज्य सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि किसानों के हितार्थ नीति बनाएं। किसान सम्पन्न होगा तभी गांव की तस्वीर बदलेगी। पटवारी यहीं नही रूके, उन्होंनें प्रदेश सरकार पर जमकर हमला बोला। कहा कि २०१८ में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद उसकी नीति गरीब, मजदूर व किसानों के उत्थान की दिशा में प्रारंभ हुए कार्यो से भाजपा बौखला गई थी। यही बौखलाहट उन्हें खरीद-फरोख्त की राह पर ले गई। पूर्व मंत्री जीतू पटवारी ने भाजपा सरकार को झूठ बोलने वाली सरकार बताया। कहा कि प्रदेश की जनता भाजपा सरकार की घोषणाओं के तीरों को भंलीभांति समझ चुकी है, आगामी विधानसभा चुनाव में इसका जबाव देने को आतुर है। अगर कांग्रेस सरकार बनती है तो रसोई गैस की टंकी के दाम जो ११०० रुपए से अधिक पहुंच गए हैं, उसे ५०० रुपए किया जाएगा। वहीं प्रदेश की महिलाओं को १५०० रुपए प्रतिमाह दिए जाएंगे। कार्यक्रम को कालापीपल के विधायक कुणाल चौधरी ने भी संबोधित करते हुए कहा कि ओपन मार्केट में अनाज का भाव बढ़ना था। परंतु सरकार की गलत नीतियों के चलते अनाज के दाम नहीं बढ़े। श्री चौधरी ने कहा कि इन सबका असर जमीन पर दिखाई पड़ रहा है। प्रदेश की राशन दुकानों पर गेहूं की जगह चावल थमाया जा रहा है। सम्मेलन के सूत्रधार पीसीसी डेलीकेट व पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष लक्ष्मीनारायण पंवार ने कहा कि किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए लेनदेन मजबूरी बना हुआ है। कृषि उपज मंडी के प्लेटकांटे में गड़बड़ी का मामला हाल ही में सामने आया है। जाने कब से गरीब व भोलेभाले किसानों के साथ ऐसा हो रहा था। उनके शोषण के खिलाफ कांग्रेस ने आवाज बुलंद की। तब कहीं इस मनमानी पर अंकुश लगा। पूर्व विधायक डॉ आरके दोगने ने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने का दावा करने वाली भाजपा सरकार के राज में आए तो दुगनी नहीं हुई लेकिन खेती की लागत जरूर दुगनी हो गई है। जिससे किसान व किसानी दोनों प्रभावित हुए हैं। श्री दोगने ने कहा कि सोसायटियों के खरीदी केन्द्रों से उगाई जारी है। यही कारण है कि सोसायटियों में गड़बड़ी को बल मिलता है। पूर्व विधायक ने कहा कि कृषि मंत्री कमल पटेल जब विपक्ष में थे तो उन्हें रोजाना नर्मदा में रेत का अवैध उत्खनन दिखाई देता था। डंपरो को रोककर उनका तौल कराते थे। इतना ही नही सरकार को एनजीटी का आईना भी दिखा चुके हैं। मगर अब उन्हें इसकी जरा भी सुध नहीं है। किसान सम्मेलन को पूर्व मंत्री पीसी शर्मा, पूर्व प्रदेश कांग्रेस सचिव प्रकाशचन्द्र वशिष्ट, पूर्व मंडी अध्यक्ष हीरालाल पटेल, किसान प्रकोष्ठ के प्रदेशाध्यक्ष केदार शंकर सिरोही, महिला कांग्रेस की अध्यक्ष प्रमिला ठाकुर, खिरकिया जनपद अध्यक्ष रानू पटेल, अभिजीत शाह, ओम सोलंकी, हरिमोहन शर्मा, दिनेश यादव और गंगाराम पटेल ने भी संबोधित किया। इस मौके पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरिभाऊ गद्रे, अरूण जायसवाल, विश्नोई सभा के अध्यक्ष आत्माराम पटेल, पूर्व जनपद अध्यक्ष रामचरण शिंदे, पूर्व यूथ कांग्रेस अध्यक्ष राजेश पटेल, युकां जिलाध्यक्ष राहुल जायसवाल, सुप्रिया पटेल, रजनी कलम, सुहागमल विश्नाई, राजेश पंवार, सचिन गोदारा, आनंद पटेल सोनतलाई, अभिषेक जाणी, सुनील कांवा सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद थे।
एक-दूसरे को लगवाया गले
कांग्रेस के किसान सम्मेलन में उस समय तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी, जब पूर्व मंत्री जीतू पटवारी ने कार्यक्रम के अंत में पूर्व जिलाध्यक्ष लक्ष्मीनारायण पंवार और पूर्व विधायक डॉ आरके दोगने से एक-दूसरे को गले लगाने को कहा। जैसे ही दोनों नेता गले मिले तो कार्यकर्ताओं में एक नई ऊर्जा दिखाई दी। हालांकि ये मेल क्या रंग लाएगा? यह भविष्य के गर्भ में है।
इन बातों पर दिया जोर
किसान सम्मेलन के जरिये कांग्रेस ने कार्यकर्ताओं में जान फूंकने का काम किया है। साथ ही सम्मेलन के माध्यम से संगठित होने की बात पर जोर दिया। वहीं केन्द्र एवं प्रदेश सरकार पर व्यवस्थाओं का दुरूपयोग तथा वर्ष २०२० में क्षेत्र के किसानों को उनके फसल नुकसानी के एवज में काफी कम राशि का मुद्दा एवं निचली संस्थाओं को ठप्प कर देने के आरोप लगाएं हैं।

जमीनी कार्यकर्ता को मिला सम्मान
इधर, सम्मेलन की शुरूआत में कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ता को सम्मान प्रदान किया गया। दरअसल, कांग्रेस की बुनकर प्रकोष्ठ के प्रदेशाध्यक्ष ने पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता प्रेम बरैया को प्रकोष्ठ का जिलाध्यक्ष नियुक्त किया है। मंच से प्रेम बरैया के नाम की घोषणा होते ही वह भावुक हो गया। मंच का संचालन कर रहे टिमरनी नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष सुभाष जायसवाल ने प्रेम बरैया को मंच पर बुलाया। जहां ससम्मान उन्हें नियुक्ति-पत्र सौंपा गया। इस दौरान अन्य कार्यकर्ताओं ने तालियां बजाकर हर्ष व्यक्त किया।
सम्मेलन की झलकियां….
– पौने 3 घंटे देरी से शुरू हुआ कार्यक्रम
– नपा के टैंकरों ने कूलरों में भरा पानी
– सम्मेलन में जिलेभर से आए किसान
– मंच पर कुर्सी पाने के लिए जद्दोजहद

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