अनोखा तीर, हरदा। स्व.महेश प्रसाद व्यास की पुण्य स्मृति में पंडित विमल तिवारी के मुखारबिंद से अभिषेक ग्रीन वेली में कॉलोनी गार्डन में श्रीमती कृष्णा व्यास परिवार द्वारा श्रीमदभागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा के पांचवें दिन कथावाचक पंडित विमल तिवारी ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, माखन चोरी तथा गिरिराज धरण की कथा का प्रसंग सुनाया। पंडित श्री तिवारी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं हमारे जीवन के लिए प्रेरणादायक हैं। भगवान कृष्ण ने बचपन में अनेक लीलाएं की। नटखट स्वभाव के चलते यशोदा मां के पास उनकी हर रोज शिकायत आती थी। उन्होंने गोवर्धन पर्वत की पूजा का प्रसंग विस्तारपूर्वक बताया। भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी लीलाओं से जहां कंस के भेजे विभिन्न राक्षसों का संहार किया, वहीं ब्रज के लोगों को आनंद प्रदान किया। कथा के प्रसंग में उन्होंने कहा कि इंद्र को अपनी सत्ता और शक्ति पर घमंड हो गया था। उसका घमंड दूर करने के लिए भगवान ने ब्रज मंडल में इंद्र की पूजा बंदकर गिरिराज जी की पूजा शुरू करा दी। पंडित श्री तिवारी ने कहा कृष्ण भगवान ने नंदबाबा से कहा कि हमें तो गिरिराज जी की पूजा करनी चाहिए तो नंदबाबा ने भगवान कृष्ण से कहा कि नहीं ऐसा करने से इंद्र नाराज हो जाएंगे, जिस पर भगवान कृष्ण ने कहा कि हम जैसा कर्म करते है वैसा ही फल हमें प्राप्त होता है तो उस हिसाब से तो हमें सब कुछ तो गिरिराज जी से मिलता है तो हमें उनकी ही पूजन करना चाहिए। हमारे भगवान तो गिरिराजधरण जी ही है। भगवान कृष्ण की बात मानकर नंदबाबा ने ब्रजवासियों के साथ गिरिराज जी की पूजन की तरह-तरह के पकवान का भोग लगाया। इससे गुस्साए इंद्र ने ब्रज मंडल पर भारी बरसात कराई। प्रलय से ब्रजवासियों को बचाने के लिए भगवान कृष्ण ने कनिष्ठा उंगली पर गिरिराज पर्वत को सात दिनों तक उठा रखा। साथ ही श्रीकृष्ण के कहने पर अगस्त ऋषि ने प्रलयरूपी पानी पीने को पी गए। भगवान कृष्ण दिन में आठ बार भोजन करते थे और गिरिराज जी को कनिष्ठा पर धारण करने के कारण उन्हें ब्रजवासियों ने सात दिन बाद 56 पकवानों का भोजन कराया। तब से भगवान कृष्ण को 56 भोग लगाये जाते हैं। आज कंस वध एवं रूक्मिणी विवाह की कथा सुनाई जाएगी। व्यास परिवार ने सभी धर्मप्रेमी जनता से निवेदन किया कि वह कथा, आरती एवं प्रसादी का लाभ लें।
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