राजनैतिक दबावों के चलतें कई डॉक्टरों पर नहीं हो सकी कार्रवाई
नसरूल्लागंज। क्षेत्र में मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाले झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई का नंबर आता हैं तो राजनैतिक दबावों के कारण इन पर कार्रवाई नहीं हो पाती। ऐसी स्थिति में नगर ही नहीं बल्कि संपूर्ण क्षेत्र में गली-गली झोलाछाप डॉक्टरों की संख्या बढ़ती जा रही है। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग के द्वारा समय-समय पर कार्रवाई नहीं की जाती। नतीजा यह होता हैं कि आये दिन झोलाछाप डॉक्टरों के गलत इलाज के कारण महिला, पुरुष व बच्चों की जान चली जाती हैं। पिछले दिनों स्वास्थ्य विभाग के द्वारा दिखावे के लिए झोलाछाप डॉक्टरों पर शिंकजा कसने का प्रयास किया गया। लेकिन वह भी रस्म अदायगी साबित हुआ। तीन डॉक्टरों के क्लीनिकों की जांच कर महज एक डॉक्टर के खिलाफ मामला दर्ज कराने के बाद विभाग ने इस मामले में आगे कोई कार्रवाई नहीं की। हालांकि स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई से नगर व ग्रामीण क्षेत्रों में बिना डिग्री के इलाज कर रहे झोलाछाप डॉक्टर भूमिगत हो गये है और कार्रवाई के डर से बाहर नहीं आ रहे हैं। उल्लेखनीय है कि करोड़ो रुपए के संसाधन व इंफ्रास्ट्रक्चर देकर नगर में सिविल अस्पताल खोले जाने के बावजूद भी क्षेत्र के मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा हैं। इसी का नतीजा हैं कि नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों को सिविल अस्पताल के डॉक्टरों के बजाय झोलाछाप डॉक्टरों पर अधिक विश्वास रहता हैं। जिससे सिविल अस्पताल में कम लेकिन इन डॉक्टरों के निजी क्लीनिकों पर अधिक भीड़ देखने को मिलती है। एक अनुमान के मुताबिक नगर में बैठे झोलाछाप डॉक्टरों के द्वारा प्रतिदिन कम से कम 200 से अधिक मरीजों का उपचार किया जाता हैं। सिविल अस्पताल से दवाएं नहीं मिलने व डॉक्टरों के द्वारा ठीक ढंग से इलाज नहीं किये जाने के कारण गरीब लोग कम फीस होने के कारण झोलाछाप डॉक्टरों की शरण में पहुंचते हैं।
एक दिन कार्रवाई के बाद भूमिगत हुआ स्वास्थ्य अमला
गुरुवार देर शाम को स्वास्थ्य अमले ने नगर के तीन क्लीनिकों पर पहुंचकर कार्रवाई की, इस दौरान एक क्लीनिक बंद होने पर दो क्लीनिकों से अमले ने एलौपैथिक दवाएं जब्त कर क्लीनिकों को सील किया था। डॉक्टरों ने इस दौरान कहा था कि इन डॉक्टरों के खिलाफ थाने में केस दर्ज किया जाएगा, लेकिन इस मामले में राजनैतिक दबाव के चलतें महज एक डॉक्टर पर ही कार्रवाई की गई, शेष को विभाग द्वारा संजीवनी प्रदान की गई। एक दिन कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य अमला भूमिगत हो गया। इस संबंध में कोई भी डॉक्टर जबाव देने को तैयार नहीं हैं कि आखिरकर यह कार्रवाई बंद क्यों कर दी गई।
आखिर क्यों हैं झोलाछाप डॉक्टरों का वर्चस्व
जानकारी के मुताबिक नगर व क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टरों का वर्चस्व बना हुआ है। इसका सबसे बड़ा कारण सिविल अस्पताल में मरीजों को सही उपचार नहीं मिलना है। यहां के डॉक्टरों द्वारा मरीजों का इलाज ओपीडी में कम और घरों पर मोटी रकम लेकर ज्यादा किया जाता है। इसी का नतीजा हैं कि झोलाछाप डॉक्टरों के पास मरीजों की भीड़ अपना इलाज कराने के लिए पहुंचती है। एक अनुमान के मुताबिक सिविल अस्पताल में पदस्थ डॉक्टरों के द्वारा 300 रुपए परामर्श शुल्क के रूप में वसूला जाता है। वहीं झोलाछाप डॉक्टर दवाओं व फीस सहित 150 से 200 रुपए में मरीजों का इलाज कर देते हैं। जिससे मरीज इनके पास अधिक पहुंचते है।
करोड़ो के संसाधन भी इलाज में नाकाफी
मुख्यमंत्री का विधानसभा का नसरुल्लागंज स्वास्थ्य सेवा में सबसे अधिक पिछड़ा हुआ नजर आ रहा है। यहां पर करोड़ो रुपए के संसाधन तो उपलब्ध करा दिये गए है, लेकिन अस्पताल में डॉक्टरों व संसाधन विशेषज्ञों की गैर मौजूदगी होने से मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। यहीं स्थिति यहां पर पदस्थ डॉक्टरों की है। अस्पताल में सोनोग्राफी मशीन होने के बाद भी मरीजों को बाहर की शरण लेना पड़ती है। कई बार तो गर्भवती महिलाओं को भी परेशान होना पड़ता है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के करोड़ो के संसाधन भी मरीजों को समुचित उपचार देने में नाकाफी साबित हो रहे हैं।
इनका कहना है।
इस संबंध में सीबीएमओं मनीष सारस्वत ने बताया कि समय-समय पर स्वास्थ्य अमले के द्वारा झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई कर शिंकजा कसा जाता है। पिछले दिनों ग्रामीण क्षेत्रों में बीड प्रभारी डॉक्टरों को निर्देश दिए हैं कि ऐसे डॉक्टरों पर शिकंजा कस कार्रवाई की जाये। इसके अलावा सिविल अस्पताल में भी मरीजों को समुचित उपचार देने की व्यवस्था की गई हैं। यदि किसी डॉक्टर के द्वारा इलाज नहीं किया जाता हैं तो वह इसकी सीधे लिखित में शिकायत कर सकते हैं।
Views Today: 4
Total Views: 158

