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Thursday, 22 October 2026
खंडवा

सैलानी बाबा की मजार पर उमड़ रहा श्रद्धालुओं का सैलाब  

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खंडवा। धार्मिक सद्भावना की मिसाल जिला मुख्यालय से 23 किमी दूरी पर स्थित सैलानी बाबा की मजार पर देह बाधा पीडि़तों की चीख पुकार से वातावरण गूंज रहा है। पीडि़त पहुंचते ही झूम रहे है, कोई जमीन पर लोट रहा है तो कोई सुधबुध भूलकर बदहवास है। समूचा मंजर देखकर लगता है जैसे भूतों का मेला लगा हुआ है। सैलानी बाबा दरगाह का दृश्य रोमांच से भरा हुआ है।

होली त्यौहार से यहां पांच दिवसीय मेला वर्षो से लगता आ रहा है और रंगपंचमी मेले का खास दिन होता है। इस दिन दरगाह की खिदमत करने वाला परिवार चादर चढ़ाता है। इस अवसर की प्रतिक्षा बाबा के अनुयायियों को बेसब्री से रहती है। चादर चढ़ाने के लिए खण्डवा जिले के अलावा प्रदेश के जिलों के साथ अन्य प्रदेशों से भी भक्तों का सैलाब उमड़ पडता हैं।

मुख्य दिवस पर चढ़ेगी चादर

रंगपंचमी के अवसर पर रविवार को मुख्य दिवस होने से सैलानी बाबा की मजार पर भारी भीड़ का आना शुरू हो गया है। होली से शुरू हुआ यह मेला दिनों दिन रंगत पकड़ता जा रहा है। सैलानी बाबा मजार परिसर में बड़ी संख्या में लोगों के जरूरतों के सामान की दुकानें लगी हुई है। बाबा की मजार पर चादर चढ़ाने वालों का तांता लगा हुआ हैं। लोग मन्नत पूरी होने पर चादर, लोभान, अगरबत्ती और मिश्री चढ़ाते हैं। रंगपंचमी पर चादर चढ़ाई जायेगी तो हजारों लोग मौजूद रहेंगे।

इस अवसर पर दरगाह परिसर में पैर रखने की जगह नहीं रहेगी। अनवर भाई का कहना है कि देह बाधा से पीडि़तों को लेकर बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। अधिकांश पीडि़त तो इस स्थान पर होली से लेकर पंचमी तक डेरा डाले रहते हैं। बताया जाता है कि सैकड़ों साल पूर्व सैलानी बाबा यहां आए थे। लोगों का सैलानी बाबा पर अटूट विश्वास हैं और वे अपनी दुख तकलीफ में बाबा की दरगाह पर आकर मन्नत मानते हंै। पीडि़तों का विश्वास है कि उनकी मुराद पूरी होती है।

खुद देखो अदृश्य कार्रवाई

रंगपंचमी पर ही इस स्थल पर मेला क्यों लगता है? यह जिज्ञासा अनेक लोगों को इस स्थान पर खींच लाती है। कहा जाता है कि यहां बाबा की अदृश्य कार्रवाई को देखते हुए उन्हें अपने प्रश्न का उत्तर प्रत्यक्ष रूप से मिल जाता हैै। यहां पर तीन भाईयों की दरगाह बनी हुई है।

जाली का है चमत्कार

सैलानी बाबा की मजार के चारों ओर लोहे की एक जाली है। इसे पकड़ते ही भूतों से पीडि़त व्यक्ति जोर से चिल्लाने लगता हैै। तरह-तरह की हरकतें करता है। बाबा से रहम की भीख मांगता है। ऐसे हजारों रोगियों को मेले पांच दिन तक यहां देखा जा सकता है।

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