आज मजदूर दिवस पर विशेष  

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न्याय की आस में 32 साल से अपने हक की कानूनी लड़ाई लड़ रहे सोयाबीन प्लांट हरदा के मजदूर
-श्रम न्यायालय के आदेश के बाद भी कलेक्टर फैक्ट्री प्रबंधन से नहीं करा पाए पुराने वेतन की वसूली
-श्रमिकों ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश से लगाई गुहार
अनोखा तीर, हरदा। स्थानीय इंदौर रोड स्थित सिद्धार्थ सोया प्रालि सोयाबीन प्लांट में कार्यरत श्रमिक 32 साल से अपने हक की कानूनी लड़ाई लड़ रहे है। लेकिन कानूनी अड़चने एवं प्रशासनिक अधिकारियों की अनदेखी व लापरवाही के कारण उन्हें अभी तक न्याय नहीं मिला है। सोया कर्मचारी यूनियन इंटक हरदा के अध्यक्ष संदीप शर्मा ने बताया कि कारखाना प्रबंधन ने 1994 में यूनियन के कुछ श्रमिक पदाधिकारियों को द्वेषभावना से नौकरी से निकाल दिया था। इसके बाद श्रमिकों ने श्रम न्यायालय भोपाल में केस दायर किया। जिस पर न्यायालय ने 2004 में आदेश जारी कर कारखाना प्रबंधक को यूनियन के महामंत्री सुरेश बादर व मंत्री असलम खान को नौकरी पर वापस रखने और पुराना वेतन देने के आदेश दिए। इस आदेश के खिलाफ सिद्धार्थ सोया प्रालि की ओर से आद्यौगिक न्यायालय भोपाल में अपील कर दी गई। इस न्यायालय ने भी 2005 में दोनों श्रमिकों को नौकरी पर रखते हुए पुराने वेतन का 75 प्रतिशत देने के आदेश दिए।
श्रम न्यायालय ने 2019 में श्रमिकों को हरदा फैक्ट्री में नौकरी पर रखने दिए थे आदेश-
इस आदेश के खिलाफ सिद्धार्थ सोया ने उच्च न्यायालय जबलपुर में अपील कर दी गई। जहां मामला विचाराधीन के दौरान सिद्धार्थ सोया प्रालि ने नोबल ग्रेन इंडिया प्रालि दिल्ली को फैक्ट्री बेच दी। तब नोबल ग्रेन ने दोनों श्रमिकों को 2009 में नौकरी पर वापस रखते हुए नियमविरूद्ध तरीके से कोटा राजस्थान व अकोला महाराष्ट्र स्थित फैक्ट्री मेें ट्रांसफर करने के पत्र जारी कर दिए। जिस पर दोनों श्रमिकों ने श्रम न्यायालय नर्मदापुरम में केस दायर कर हरदा स्थित सोयाबीन फैक्ट्री में पदस्थ करने की मांग की। जहां केस विचाराधीन के दौरान नोबल ग्रेन ने भी श्रीनाथ सालवेक्स प्रालि भोपाल को फैक्ट्री बेच दी। मामले में श्रम न्यायालय ने सुनवाई करते 2019 में श्री नाथ साल्वेक्स भोपाल को दोनों श्रमिकों को हरदा फैक्ट्री में ही नौकरी पर रखने के आदेश दिए। लेकिन श्रीनाथ साल्वेक्स ने दोनों कर्मचारियों को हरदा फैक्ट्री में न तो नौकरी रखा न ही पुराना वेतन दिया।
कलेक्टर भी नहीं करा पाए पुराने वेतन के वसूली
दोनों श्रमिकों ने श्रम न्यायालय नर्मदापुरम में केस दायर कर कलेक्टर हरदा के माध्यम से आरआरसी जारी कर फैक्ट्री प्रबंधन से पुराने वेतन की वसूली कराने की मांग की। जिस पर श्रम न्यायालय ने 2022 में कलेक्टर हरदा को आदेश जारी कर तहसीलदार  के माध्यम से दोनों श्रमिकों का करीब 10-10 लाख रुपए के पुराने वेतन की वसूली श्रीनाथ साल्वेक्स से कराने के निर्देश दिए थे। जिसे करीब तीन साल बीत चुके है। लेकिन श्रमिकों को अभी तक पुराना वेतन व नौकरी नहीं मिल पाई है। वहीं श्रीनाथ साल्वेक्स ने 2024 में पहले श्रम न्यायालय नर्मदापुरम व बाद में औद्यौगिक न्यायालय भोपाल में अपील करते हुए सुनवाई का अवसर नहीं मिलने को कहा। जिस पर 2026 में औद्यौगिक न्यायालय भोपाल ने श्रम न्यायालय नर्मदापुरम को मामले की दोबारा सुनवाई करने के आदेश दिए है। ऐसे में श्रमिक अब श्रम न्यायालय नर्मदापुरम के चक्कर काटने पर मजबूर हो रहे हैं।
जनसुनवाई में आवेदन देने के बाद भी श्रमिकोंं के हाथ खाली
संदीप ने बताया कि नोबल ग्रेन इंडिया प्रालि ने उनका भी 2009 में अकोला महाराष्ट्र स्थानांतरण कर दिया था। जिसके खिलाफ उन्होंने भी श्रम न्यायालय नर्मदापुरम में केस दायर किया था। जिस पर श्रम न्यायालय नर्मदापुरम व बाद में औद्यौगिक न्यायालय भोपाल ने ट्रांसफर को अवैध मानते हुए कलेक्टर को आदेश जारी कर आरआरसी के माध्यम से करीब 15 लाख रुपए का पुराने वेतन की वसूली करने के निर्देश दिए है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में वे भी तीन बार जनसुनवाई में कलेक्टर को भी आवेदन दे चुके हंै। लेकिन कलेक्टर अभी तक श्रमिकों के पुराने वेतन की वसूली श्रीनाथ साल्वेक्स से नहीं करा पाए है। श्रमिकों ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री,  मुख्य न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट नई दिल्ली व हाईकोर्ट जबलपुर, मुख्यमंत्री, राज्यपाल, कानून मंंत्री, स्थानीय विधायक आरके दोगने को 23 मार्च को आवेदन प्रेषित कर शीघ्र न्याय दिलाने की गुहार लगाई है। लेकिन 32 साल बाद भी श्रमिकों के हाथ खाली है और वे न्यायालय के चक्कर लगाने पर मजबूर हो रहे हंै।

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