अनोखा तीर, हरदा। मंगलवार को संत शिरोमणि सेन महाराज की 726वीं जयंती हर्षोल्लास से मनाई गई। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह हवन-पूजन और महाआरती से हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। शाम को नेहरू पार्क से एक शोभायात्रा निकाली गई, जो नगर के मुख्य मार्गों से होते हुए अजनाल नदी तट स्थित गुप्तेश्वर मंदिर तक पहुंची। शोभायात्रा में बच्चों, युवाओं और महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों में भाग लिया। ढोल-नगाड़ों के साथ यात्रा आगे बढ़ी। इस अवसर पर समाज के प्रतिष्ठान बंद रखे गए। समारोह के दौरान समाज के बुजुर्गों को शाल और श्रीफल से सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त, 75 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के बाद उपस्थित जनसमूह के लिए सामूहिक भोज का आयोजन किया गया। बारबर एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक तंवर ने संत सेन महाराज के जीवन और शिक्षा पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भक्तमाल के टीकाकार प्रियदास और अगस्त संहिता के अनुसार, संत सेन महाराज का जन्म विक्रम संवत 1357 में वैशाख कृष्ण द्वादशी को मध्यप्रदेश के बांधवगढ़ में हुआ था। बचपन में उनका नाम नंदा था। दीपक तंवर ने बताया कि उनके पिता मुकुंद राय, माता जीवनी और पत्नी का नाम सुलखनी था। संत सेन महाराज बचपन से ही विनम्र, दयालु और ईश्वर में आस्था रखने वाले व्यक्ति थे। उन्होंने 1440 ईस्वी में देह त्याग किया। उनकी शिक्षाएं आज भी समाज को प्रेरित करती हैं।


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