-लगे थे उपयंत्री की मानसिक प्रताड़ना से मौत जैसे गम्भीर आरोप
-इवने की पदस्थापना के आदेश के बाद जनपद कर्मचारी सहित सचिव संघ में बड़ी चर्चा
योगेन्द्र सिंह राजपूत, खिरकिया। खिरकिया जनपद पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत बड़ी ही विचित्र परिस्थिति देखने को मिल रही है। एक ओर जहां उच्च अधिकारियों को न्याय संगत कार्यवाही करने के बाद उस पर अटल रहना था, वही अपनी लचर कार्यशैली सहित गम्भीर आरोपों से घिरे खिरकिया जनपद पंचायत के पूर्व सीईओ प्रवीण कुमार इवने की वापसी विभागीय उच्च अधिकारियों द्वारा वही जनपद पंचायत में कर दी गयी है। यह सवाल बेहद सोचने वाला है कि अगर कई मामलों को लेकर जब किसी जनपद सीईओ को वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा हटाया जाता है तो फिर उसी जनपद पंचायत में उस अधिकारी की पदस्थापना करना बड़ा ही विचित्र जैसा है। आपको बता दें कि जनपद सीईओ प्रवीण इवने खिरकिया जनपद पंचायत की अपने पिछले कुछ महीनों की नोकरी के दौरान ऐसे ऐसे काम कर चुके हैं कि उनके विभाग के समस्त जनपद एवं ग्राम पंचायत के अधिकारी एवं कर्मचारी उनके खिलाफ हरदा कलेक्टर धरना देने पहुंचे थे। विभाग के उपयंत्री एवं सचिव की हुई मौत को लेकर जनपद सीईओ प्रवीण इवने पर मृतकों को लेकर उन्हें मानसिक प्रताड़ना देने जैसे गम्भीर आरोप लगे थे। इस दौरान सभी ने हरदा कलेक्टर सिद्धार्थ जैन को ज्ञापन सौंपा था। उसके बाबजूद उसी जनपद पंचायत में उनकी वापसी होने से सम्पूर्ण सचिव संघ एवं संबंधित कर्मचारियों के बीच बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है। ऐसे कई मामले हैं जिसे लेकर स्थानीय मीडिया ने अपनी खबरों के माध्यम से इनके कारनामों को उज़ागर किया था। बीते वर्ष में सीसीटीवी कैमरे घोटाले को लेकर कई ग्राम पंचायतो की खबरों का प्रकाशन हुआ, जिसके बाद जिला कलेक्टर द्वारा जांच के आदेश दिए थे परंतु पूरा एक वर्ष बीत जाने के बाद भी सीईओ प्रवीण इवने द्वारा किसी प्रकार की कोई जांच नही की गई। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पता चला था कि सीसीटीवी कैमरों में हुई इस बड़े गड़बड़झाले के पीछे कुछ प्रतिशत इनका हाथ भी है। वही ये पूर्व में एक अपने ख़ास सहायक सचिव जो इनके सभी कामो में सहायक होते है और इनके वाहन को भी चलाते हंै, जो पूर्ण रूप से नियम विरुद्ध है उसे लेकर भी कई सवालों के घेरे में थे। वहीं एक ग्राम पंचायत के सचिव जो खिरकिया निवास करते है उनके ऊपर सीईओ का पूरा आशीर्वाद रहता है, वे अपनी ग्राम पंचायत की कुर्सी से एक एक हफ्ते नदारद रहते हैं और कथा प्रवचन करते हैं। इनकी छुट्टी पर सीईओ का पूरा आशीर्वाद रहता है। भले फिर सचिव की अनुपस्थिति में जनता परेशान हो, परंतु इतना सब होने के बाद ऐसे अफ़सर को जिला प्रशासन द्वारा उसी जनपद पंचायत की कुर्सी पर बैठना कहीं न कहीं पूरे सिस्टम कमजोर करने जैसा लगता है। अब देखना होगा कि सैकड़ो मामलों से घिरे सीईओ पर जिला प्रशासन का आशीर्वाद रहेगा या फिर नियम एवं वर्तमान स्थिति देखते हुए इस पदस्थापना में कोई बदलाव होगा।
इनका कहना है…
जिले में वरिष्ठ सीईओ की संख्या कम है, इसलिए वरिष्ठ सीईओ होने के कारण उन्हें वहां भेजा है, इनके कार्यालय में सीसीटीवी कैमरे सहित होने वाले कार्यो की जांच की जाएगी।
अंजली जोसेफ सीईओ, जिला पंचायत हरदा।

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