प्रमाद में जीवन बिगड़ता है, स्वाद से तन बिगड़ता है : सारिका मसा

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अनोखा तीर, खिरकिया। उपाश्रय भवन में विराजित पूज्य श्री किरण बालाजी महाराज साहब ठाणा चार सुख सतापूर्वक विराजमान है। पूज्य सारिका जी महाराज साहब ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए बताया कि पांच इंदियों में आज रसेन्द्रिय (जीभ) का मानव जीवन में क्या असर होता है, पकड़ना मुश्किल है या छोड़ना मुश्किल है। संसार को पकड़ने के बाद उसे छोड़ना बहुत मुश्किल हो जाता है। एक श्रेष्ठी के घर शादी थी आंगन में सामान बहुत पड़ा हुआ था, उसी आंगन में एक पेड़ था पेड़ पर एक बंदर बैठा हुआ था, उस बंदर ने उन सामानों के बीच में घड़ा देखा जिसके मुंह पर कपड़ा बंधा हुआ था बंदर ने नीचे उतारकर उस घड़े का कपड़ा हटाकर देखा तो उसमें लड्डू पड़े थे। घड़े का मुंह बहुत छोटा था बंदर ने उसमें हाथ डाला और मन में लालच आई की कुछ ज्यादा लड्डू हाथ में पकड़ लूं और उसने 5, 6 लड्डू हाथ में पकड़ लिए। लड्डू अधिक होने से हाथ घड़े से बाहर नहीं निकला वह बहुत कोशिश करता रहा लेकिन उसका हाथ बाहर नहीं निकाल पाया। इतने में घर का मालिक आ गया और बंदर को भगा दिया। ऊपर से डंडे भी खाने पड़े। ज्ञानी भगवान बताते हैं कि कर्मरूपी डंडा लेकर हमारे सिर पर खड़ा है और हम संसार रूपी घड़े में हाथ डालकर बैठे हैं। हम खुद भी फंसे हैं और दूसरों को भी फंसा रहे हैं। यदि कोई दीक्षा लेने के लिए आगे बढ़ता है तो हम उसे भी पीछे खींचने लगते हैं। एक व्यक्ति टोकरी में केकड़ा लेकर आया और बाजार में किसी अन्य व्यक्ति से बात करने लग गया उस टोकरी का ढक्कन खुला था तो उस व्यक्ति ने कहा भाई इसका ढक्कन ढक लो वरना यह जीव बाहर निकल जाएंगे, तो वह पहला व्यक्ति बोला कि तुम फ़िक्र मत करो यह केकड़े हैं उनकी वृत्ति होती है, एक आगे बढ़े तो दूसरा टांग खींचकर उसे नीचे कर लेता है। बाहर नहीं निकलने देता। इसी प्रकार हम संसारी जीवों की भी स्थिति है। जो मोह के कारण कोई यदि संसार से बाहर निकल रहा हो तो उसे भी नहीं निकलने देते हैं।
पूज्य शिल्पा श्रीजी महाराज साहब ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए बताया कि सात वार में सबसे अच्छा वार कौन सा है। सभी को रविवार अच्छा लगता है क्योंकि रविवार छुट्टी लेकर आता है। रविवार आए तो हमारा घूमने फिरने का मन करता है। रविवार आए तो हमारा बाहर जाकर खाना खाने का मन करता है और कुछ ऐसे जीव भी हैं, जिन्हें रविवार आए तो सोचा आज छुट्टी का दिन है तो धर्म आराधना कर लूं, क्योंकि जिसको जिस चीज की प्यास रहती है वह उसी के पास आता है। पांच इंद्रियों में से रस इन्द्रिय को जितना बहुत कठिन है, पिताजी ने बच्चे को पूछा कि बेटा तुमने रामायण देखी, अच्छा अब बताओ इस रामायण में तुम क्या बनना पसंद करोगे। राम बनोगे बच्चे ने बोला नहीं तो फिर लक्ष्मण बनना नहीं फिर तो भरत बनना नहीं तो फिर राम भक्त हनुमान जैसी भक्ति करना तो बच्चे ने बोला नहीं तो फिर पिताजी ने चिड़ कर बोला कि आखिर तुम्हें कौन पसंद आया? किसके जैसा बनना है तो बच्चे ने बोला मुझे रावण जैसा बनना है। क्योंकि रावण के पास 10 मुंह है तो वह एक साथ 10 आइसक्रीम खा सकता। रसना इंद्रिय खाकर भी बिगड़ती है और बोलकर भी बिगड़ती है। भगवान ने हमें दो कान दिए हैं। दो हाथ दिए हैं दो आंख दी है दो पैर दिये है, पर मुंह एक दिया है। अत: हमने देखने का सुनने का चलने का हाथ से कम अधिक करना है और बोलना कम है। लेकिन यह रसना इंद्रिय अकेली होते हुए दो काम करती है और दोनों से कामों में बिगाड़ा करती है। विवाद से मन बिगडा है। प्रमाद से जीवन बिगड़ा है और स्वाद से तन बिगड़ा है। पहले लोग घर में खाते थे और बाहर जाते थे और आज लोग बाहर खाते हैं और घर में जाते हैं।

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