महर्षि ज्ञान पीठ में गूंजे फिर कबीर के भजन

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-बच्चों ने सीखी लोकगायन की लय और जीवन के मूल्य
अनोखा तीर, हरदा। महर्षि ज्ञान पीठ विद्यालय, हरदा में कला संवाद फाउंडेशन द्वारा शब्द शाला का नवंबर सत्र सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। कला संवाद फाउंडेशन पिछले दो वर्षों से हरदा में कला के माध्यम से शिक्षा को जोड़ने और समाज में सकारात्मक संवाद स्थापित करने का कार्य कर रहा है। इस माह के सत्र में प्रसिद्ध लोक और कबीर भजन गायक अरुण गोयल अपनी टीम के साथ उपस्थित हुए। उन्होंने बच्चों को संत गुलाबी दास रचित लोकभजनों भावनगरी, कई ढूंढती फिरे म्हारी हे और राज मोरी सैयाँ री जैसे भजन सिखाए। भजनों के माध्यम से बच्चों ने कबीर और संत परंपरा का सार समझा शरीर की अस्थिरता, अहंकार का त्याग, प्रेम और गुरु के प्रति समर्पण जैसे मूल जीवन संदेशों को आत्मसात किया। सत्र में बच्चों ने गाकर, सुनकर और संवाद करते हुए यह अनुभव किया कि लोकभजन केवल संगीत नहीं बल्कि जीवन का दर्शन हैं। अरुण गोयल संत-वाणी की मौखिक परंपरा से जुड़े एक प्रसिद्ध लोकगायक हैं। उन्होंने बचपन से ही स्थानीय भजन गायकों के साथ साधना आरंभ की। पिता की प्रेरणा और स्वभाव की लयशीलता से वे शीघ्र ही कबीर गायन के लोकप्रिय स्वर बन गए। आज वे देश और विदेश दोनों में संत परंपरा के माध्यम से समाज सुधार और प्रेम संदेश के प्रसार का कार्य कर रहे हैं। वे एक लेखक, गीतकार और उत्कृष्ट कवि भी हैं। उनके हेकड़ी गायन और लोकभजन परंपरा में योगदान के लिए उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। विद्यालय के संस्थापक दीपक राजपूत ने कहा कि विद्यालय में कला के माध्यम से शिक्षा देना बच्चों के नैतिक और भावनात्मक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। शब्द शाला जैसे आयोजन हमारे विद्यार्थियों में भारतीयता और लोक संस्कृति के प्रति गर्व की भावना जगाते हैं। इस अवसर पर कला संवाद फाउंडेशन की ओर से अनुज महंत, जनार्दन माली और अकरम खान उपस्थित रहे। लगभग 20 से अधिक बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर संगीत के माध्यम से संत परंपरा और लोकगायन का अनुभव किया।

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