-रबी फसल को लेकर चिंतित किसान
अनोखा तीर, मसनगांव। क्षेत्र में पिछले दो दिनों से आसमान पर बादलों का डेरा बना हुआ है। दिनभर रुक-रुककर बूंदाबांदी होती रही और शाम के समय चली ठंडी हवाओं से मौसम और भी ठंडा हो गया। लगातार खराब मौसम के कारण किसानों के चेहरों पर चिंता साफ झलकने लगी है, क्योंकि इस समय रबी फसलों की बुवाई की तैयारी का दौर चल रहा है। बेमौसम बारिश से खेतों में कामकाज प्रभावित हो रहा है। नवंबर महीने में रबी फसलों की बुवाई शुरू होनी है, जिसके लिए खेतों को तैयार करना आवश्यक है, लेकिन मौसम में आए बदलाव के चलते तैयारी का काम अटक गया है। बुधवार को भी सुबह से आसमान में बादल छाए रहे, हल्की बूंदाबांदी हुई और शाम को तेज हवाओं से ठंडक और बढ़ गई।
खेतों में नमी देखकर की जा रही बुवाई
पिछले दिनों हुई बारिश के बाद जिन किसानों के खेत तैयार थे, उन्होंने मक्का और सरसों की बुवाई शुरू कर दी है। बुधवार को पलासनेर, सालाबेड़ी, कमताड़ा सहित आसपास के कई गांवों में किसानों ने खेतों में नमी देखकर बुवाई की, जिनमें अधिकांश किसानों ने मक्का लगाई है। ग्राम के किसान किर्तन रायखेरे ने बताया कि मक्का की फसल को पकने में अधिक समय लगता है, जिससे बाद में मूंग की फसल लेने में दिक्कत होती है। इसलिए जो किसान ग्रीष्मकालीन मूंग फसल लेना चाहते हैं, वे अभी मक्का की बुवाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि खेतों में नमी तो पर्याप्त है, लेकिन अधिक नमी के कारण मिट्टी पूरी तरह सूख नहीं पाई है, जिससे बीज ढकने में दिक्कत आ रही है और पौधा सूखने की संभावना भी रहती है। किसान बाजूलाल छलौत्रे ने बताया कि रबी सीजन की बुवाई का समय लगभग आ चुका है। जिले के अधिकांश किसान 15 नवंबर के आसपास बोनी करते हैं। वर्तमान नमी के कारण बुवाई संभव है, लेकिन फसल उगने के बाद सिंचाई जल्दी करनी पड़ेगी।
तूफान का असर
कार्तिक महीने में चल रही तेज हवाओं और बेमौसम बारिश को आंध्र प्रदेश व तमिलनाडु की ओर उठे तूफान ‘मोथाÓ का असर माना जा रहा है। लगातार दो दिनों से सूरज न निकलने के कारण मौसम सर्द हो गया है, जिससे जनजीवन पर भी असर पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में सर्दी, जुकाम, बुखार और खांसी जैसी मौसमी बीमारियां बढ़ने लगी हैं।
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