-विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों में झलकी उत्साह की झलक
अनोखा तीर, हरदा। शरद पूर्णिमा की रात्रि को देवी लक्ष्मी का धरती पर आगमन माना जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने माता लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना कर समृद्धि की कामना की। चंद्रमा की पूजा कर नैवेद्य में दूध का सेवन किया गया। शरद पूर्णिमा का महत्व बताते हुए महाराष्ट्रीयन समाज हरदा के अध्यक्ष डॉ. पराग नाईक ने कहा कि यह दिवस भक्ति, आराधना और आनंद का प्रतीक है। स्थानीय महाराष्ट्रीयन समाज द्वारा दो दिवसीय शरद पूर्णिमा उत्सव का आयोजन 5 एवं 6 अक्टूबर को सामाजिक धर्मशाला में किया गया। पहले दिन महिलाओं के लिए व्यंजन स्पर्धा, एक मिनट गेम और विशिष्ट परिधान प्रतियोगिता आयोजित की गई। मीठे व्यंजन स्पर्धा में प्रथम स्थान अपर्णा विपट और द्वितीय स्थान डॉ. शुभांगी अग्निहोत्री ने प्राप्त किया। तीखे व्यंजन वर्ग में डॉ. शुभांगी अग्निहोत्री प्रथम और वर्षा विपट द्वितीय स्थान पर रहीं। एक मिनट गेम प्रतियोगिता में पूर्णिमा सूबेदार, दीपा चैतन्य और नीता मजलीकर विजेता रहीं। उत्सव के दूसरे दिन अंताक्षरी प्रतियोगिता, प्रश्न मंच, प्रश्नोत्तरी और बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। सामाजिक बंधुओं, महिलाओं और बच्चों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम के अंत में विजेताओं को पुरस्कृत किया गया तथा चंद्रमा को नैवेद्य अर्पित कर शरद पूर्णिमा की रात्रि आराधना सम्पन्न की गई।
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