नर से नारायण होने की कला बताने वाले सदगुरु हैं सिंगाजी महाराज : चेतना भारती

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अनोखा तीर, सोडलपुर। करीबी ग्राम आलमपुर में चल रही परचरी पुराण के चतुर्थ दिवस में दीदी श्री चेतना भारती ने कहा कि संतो की वाणी निज अनुभव का उद्बोधन है। जगत में कर्ता भाव रखकर अचेतन अवस्था में किया गया हर कार्य अशांति प्रदान करता है, परंतु स्वयं को पहचानकर आंतरिक शांति को प्राप्त कर चुके बुद्ध पुरुष कर्म में लिप्त ना होकर संसार के लिए कर्म करते प्रतीत होते हैं, परंतु भीतर से वो कुछ भी नहीं करते, अकर्ता हो जाते है। निमाड़ की भूमि संत सिंगाजी महाराज के उसी आत्म ज्ञान की साक्षी है क्यूंकि गुरु महाराज ने सम्पूर्ण निमाड़ को धन्य और पुण्य भूमियों में से एक बनाया है। संत सिंगाजी महाराज की वाणी आज भी हमें सत्य की और ले जाती है, जिसे गाकर और सुनकर हम अपने जीवन को रूपांतरित कर सकते है तथा गहन अशांति, शोक, क्षुब्धता से परम आनंद और सत्य की और जा सकते है। निमाड़वासी सिंगाजी महाराज को पशुओं का देवता समझते है, पर सिंगाजी महाराज तो नर को नारायण होने की कला देने वाले सदगुरु हैं। यह बात परचरी पुराण के माध्यम से दीदी श्री चेतना भारती में व्यासपीठ से कही। जहां जहां संत सिंगाजी महाराज ने निवास किया या ठहरे वे सभी स्थान अपूर्व ऊर्जा से परिपूर्ण है। झाबुआ, देवझिरी संत सिंगाजी महाराज की साधना से ऊर्जावान और सिद्ध क्षेत्र हो गया है, जहां स्नान करने और दर्शन करने से तन और मन के रोग नष्ट होते हंै। कथा का यह भगीरथ अनुष्ठान श्री किशन जी चाचरे द्वारा किया जा रहा है।

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