
अनोखा तीर, हरदा। समय को भरोसो को नहीं कद पलटी मार जावे। भाजपा के दो नेताओं की जुबानी जंग इस समय चर्चा और विवाद का विषय बनती जा रही है। नेताजी ने बोल दिया कि आजकल फलाने सिंह को कोई रामराम भी नहीं करता। अब भला वह कहां चुप रहने वाले थे। उन्होंने भी पलटवार कर दिया- मुझे तो सैकड़ों लोग रोज करते है उन्हें कितने करते है यह खुद देख लें। बात केवल यही तक थमती नजर नहीं आ रही है बल्कि इस बात की शिकायत प्रदेश स्तर पर भी पार्टी संगठन से करने की हो रही है। दरअसल पिछले दिनों स्थानीय भाजपा कार्यालय में संस्था अभियान की एक बैठक दौरान पूर्व मंत्री कमल पटेल ने कह दिया कि आजकल पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष अमर सिंह मीणा से कोई रामराम भी नहीं करता। इस बात का किसी ने वीडियो बना लिया और अमरङ्क्षसह मीणा को भेज दिया। साल भर पहले तक लक्की जिलाध्यक्ष के रुप में महिमा मंडित होने वाले नौ साल लगातार जिलाध्यक्ष पद पर रहे अमर सिंह मीणा पिछले विधानसभा चुनाव दौरान इतने अप्रसांगिक हो गए कि अब उनकी पूछ परख ही चर्चा का विषय बन गई। कभी पार्टी के कद्दावर नेता कमल पटेल को अपना बड़ा भाई मानने वाले अमरङ्क्षसह मीणा ने पिछले विधानसभा चुनाव दौरान खुलकर कमल पटेल के विरूद्ध अपनी टिकिट की दावेदारी की थी। वहीं विधानसभा चुनाव पश्चात कमल पटेल ने खुले तौर पर श्री मीणा द्वारा भीतरघात करने का आरोप भी लगाया था। जिसके चलते हुई शिकवा शिकायत पश्चात संगठन ने अमरसिंह मीणा को जिलाध्यक्ष पद से हटाकर उपाध्यक्ष रहे राजेश वर्मा को जिलाध्यक्ष मनोनीत कर दिया। जिलाध्यक्ष पद से हटते ही अमरसिंह मीणा भाजपा के कार्यक्रमों और जनता के बीच से लगभग नदारद से हो गए है। चूंकि विधानसभा चुनाव में चाहे कमल पटेल चुनाव हार गए, लेकिन पार्टी कार्यकर्ताओं में उनका कद और सम्मान आज भी बरकरार है। पार्टी में स्थानीय स्तर पर श्री पटेल को नजरअंदाज कर कोई गतिविधि संचालित नहीं की जा सकती। ऐसी स्थिति में धुरविरोधियों की श्रेणियों में शामिल हो चुके अमरसिंह मीणा का पार्टी कार्यक्रमों से नदारद रहना या सार्वजनिक आयोजनों में बगैर पद विलुप्त होना लाजमी भी है। खैर राजनीतिक तौर पर कब किसका कौन विरोधी हो जाए और कौन खासमखास यह कह पाना संभव नहीं है। लेकिन वर्तमान में इतना तो तय है कि अमरङ्क्षसह मीणा और कमल पटेल के बीच गहरी खाई बन चुकी है। जिसके पटने के दूर तलक कोई आसार भी नजर नहीं आते। ऐसी स्थिति में कमल पटेल द्वारा यह कहना कि अब अमरसिंह मीणा को कोई रामराम करने वाला भी नहीं मिलता है तो यह समय के पलटी मारने का ही खेल है। वहीं दूसरी ओर अमरसिंह मीणा ने कहा कि सांसद प्रतिनिधि कमल पटेल कभी मेरे गांव आकर देखे, लोग कितनी पूछ परख करते है। उन्होंने तो कमल पटेल के इस बयान की पार्टी मुख्यालय शिकायत करने की भी बात कही है। वैसे यह आत्मसंतोष के लिए ठीक भी है। आखिर राजनीति में पूछ जरुरी है। अब यह अलग बात है कि यह पूछ किसके पीछे किसकी होती है और किसके न रहने से पूछ परख सब बीते दिनों की बातें हो जाती है यह तो जनता भी जानती है और नेता भी।

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