मां की हठधर्मिता के आगे प्रशासन मजबूर, कुपोषित बच्ची को अब घर पर ही दे रहे उपचार

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अनोखा तीर खंडवा, खालवा:-आदिवासी विकासखंड खालवा में तमाम सुविधाएं व्याप्त होने के बाद भी यहां के लोगों को पिछड़ेपन व अज्ञानता से बाहर न आना कई सवाल खड़ा करता है। इसका एक उदाहरण शुक्रवार को मुख्यालय से महज चार किमी दूर स्थित जूनापानी में देखने को मिला। जहां के आदिवासी अशोक पाटिल की आठ माह की बेटी कुपोषण की स्थिति में है। वहीं बच्ची की मां सुनीता भी रक्त अल्पता की शिकार है। जिन्हें हास्पिटल में भर्ती कराना आवश्यक है।

शुक्रवार को ग्राम की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सरजू बाई सुबह सुनीता के घर बच्ची का वजन लेने गई थी।बच्ची का वजन कम होने पर उसे एनआरसी में भर्ती करवाने का प्रयास किया। शाम तक परिवार न माना तो वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया। शाम पांच बजे नायब तहसीलदार, बीएमओ, परियोजना अधिकारी, पटवारी पहुंचे। देर शाम तक स्वयं ने व ग्राम सरपंच सहित आपपास के रहने वाले लोगों के सहयोग से स्थानीय बोली में भी स्वजनों को समझाने का प्रयास किया। आखिर में पुलिस को बुलाकर दबाव बनाया गया। लेकिन कुपोषित बच्ची की मां आक्रोशित हो गई व दराती उठाकर कर प्रशासनिक अधिकारियों को धौंस दे डाली।

पिता को सरकारी सुविधा पर नहीं विश्वास

जब कुपोषित बच्ची को एनआरसी खालवा में भर्ती कराने के लिए प्रशानिक अधिकारी समझाइश दे रहे थे। तभी बच्ची का पिता एक ही बात कह रहा था कि मुझे सरकारी सुविधा पर विश्वास नहीं है। पैसे व मजदूरी मिलने की बात पर कहा कि नहीं मिलती कोई मजदूरी। गांव से जो बच्चे गए थे उनके स्वजन आज भी पैसे के लिए भटक रहे हैं। जब कहा कि बच्ची व उसकी मां को अच्छा इलाज मिलेगा तो जबाव दिया कोई इलाज नहीं मिलता, परेशानी मिलती है। इस समय बच्ची जिस स्थिति ठीक है घर पर रखकर ही इलाज करवा लूंगा। अगर जबरन ले गए तो ले जाने वाले जिम्मेदार होंगे।

अधिकारिकारियों के दौरे के बाद भी लागू नहीं हुआ प्लान

गत माह कुपोषण के मामले चर्चा में आने के बाद खालवा में जिले से लेकर संभाग व भोपाल तक कर अधिकारी स्थिति का आकलन करने पहुंचे। अधिकारियों का दौरा भी मात्र औपचारिक बनकर रह गया। सभी ने यहां पर निरीक्षण के दौरान रिपोर्ट में स्वास्थ्य एवं महिला बाल विकास विभाग में समन्वय की कमी व लोगों में जागरूकता की कमी बताई व यहां के लिए नया मास्टर प्लान बनाने की बात करते हुए जागरूकता के कार्यक्रम की आवश्यकता बताई थी। लेकिन उसके बाद न तो कोई अधिकारी लौट कर आया न उनकी मास्टर प्लान लागू हुआ। फिर से वही मामले सामने आने लगे हैं, अब कहां गए जिम्मेदार अधिकारी।

ये भी जानिए…..एक माह में 54 कुपोषित

आदिवासी विकास खण्ड खालवा में कुपोषण कोई नई बात नही है, वर्षों से कुपोषण के मामले सामने आते हैं। कुछ दिन जिम्मेदार विभाग दौड़ भाग कर लेता है।इसके बाद मामला फिर ठंडे बस्ते में पड़ जाता है। कुपोषण पर लगाम के लिए प्रशासन के पास कोई स्थाई समाधान नहीं नजर आता। कुपोषण के आंकड़े देखे जाएं तो सिर्फ मई माह में ही 54 कम वजन बच्चे खालवा में भर्ती हुए। इनमें पांच अति कम वजन के बच्चों को खंडवा रेफर किया गया। मतलब प्रतिदिन दो से तीन कुपोषित बच्चे भर्ती हो रहे हैं। वर्तमान में 20 बेड की क्षमता वाले खालवा एनआरसी में 23 बच्चे भर्ती हैं। जिन्हें क्रमवार 14 दिन भर्ती रखने के बाद छुट्टी दी जा रही है।

घर पर ही दे रहे उपचार

ग्राम जूनापानी कम वजन की बच्ची को लाने के एनआरसी लाने के लिए देर शाम तक प्रयास किया, लेकिन बच्ची को स्वजनों भेजने को तैयार नहीं है। हमारी स्वास्थ्य कार्यकर्ता, आशा व आंगनवाड़ी के माध्यम से बच्ची एवं उसकी कमजोर मां का उनके घर पर ही उपचार दिया जा रहा है। एमंडाझोल, मल्टी विटामिन व आवश्यक पोषण आहार दिया जा रहा है। स्वजनों ने ध्यान नहीं दिया तो बच्ची अतिकुपोषित हो जाएगी।

-डा. अरुण सिंग, खंड चिकित्‍सा अधिकारी

बच्चों का फालोअप जरूरी है

एनआरसी में भर्ती हुए बच्चों का फालोअप जरूरी है। यहां से 14 दिन आवश्यक उपचार व पोषण देने के बाद छुट्टी दे दी जाती है। बच्चे का वजन 15 से 20 प्रतिशत बढ़ना आवश्यक है। इसलिए चार फालोअप होते हैं, जिसका रिकाॅर्ड रखा जाता है।

-डा. राकेश खेडेक, शिशु रोग विशेषज्ञ, ,खालवा

निगरानी में पोषण व दवा देंगे

जूनापानी की बच्ची को एनआरसी में भर्ती न करने की स्थिति में शासन की मुख्यमंत्री बालआरोग्य संवर्धन के तहत लाभ दे रहे हैं। जिसमें हमारी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की उपस्थित व निगरानी में प्रतिदिन नाश्ता व पोषण आहार दिया जाएगा। वहीं ग्राम की स्वास्थ्य कार्यकर्ता पांच प्रकार की दवा प्रति मंगलवार घर पहुंचकर देगी।

-नेहा यादव, परियोजना अधिकारी, महिला एवं बाल विकास, खालवा

क्षेत्र के एनजीओ के सदस्यों के साथ की समन्वय बैठक

खालवा परियोजना द्वारा खालवा विकासखंड में कार्यरत पांच एनजीओ प्रतिनिधियों रामकृष्ण विवेकानंद सेवा समिति से भानुप्रताप सिंह एवं राहुल कोकाटे, पिरामल हेल्थ संस्था से सतीष वर्मा, स्पंदन संस्था से सूरज बकोरिया एवं पूजा निषोद, केडीएसएस से राकेश करोले, रेंगु सोशल वेलफेयर फाउंडेशन से शिवनारायण धुर्वे के साथ समन्यवय बैठक आयोजित की गई। जिसमें सभी प्रतिनिधियों से विभाग की अपेक्षाएं साझा की गई।

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