बढ़ती गर्मी के साथ नीचे लुढ़क रहा जलस्तर

WhatsApp Image 2025-09-19 at 11.24.35 PM

 

बढ़ती आबादी के साथ साथ सिंचाईं कार्यो में इजाफा होने के कारण क्षेत्र में जहां पानी की उपयोगिता बढ़ी है। वहीं दूसरी ओर पानी को बचाने यानि जल संरक्षण मुहिम यहां फिसड्डी है। फलस्वरूप नियम एवं जागरूकता कार्यक्रमों के बावजूद पानी को सहेजने के उपाय नगण्य है, जो कहीं ना कहीं भविष्य की दृष्टि से चिंता का विषय है। इन सबके बीच इस वर्ष बढ़ती गर्मी के साथ भू-जलस्तर भी तेजी से लुढ़क रहा है। जिसका असर यहां देखने को मिल रहा है।

 

सड़क पर व्यर्थ बह रहा पानी

अनोखा तीर, हरदा। जल ही जीवन है। जल को व्यर्थ ना बहायें और जल है तो कल है जैसे महत्वपूर्ण दीवार स्लोगन केवल दिखावा साबित हो रहा है। जबकि जल संरक्षण मुहिम को लेकर कई लोग प्रयासरत हैं। उस दिशा में निरंतर काम कर रहे हैं, साथ ही अन्य लोगों को भी जागरूक करने में जुटे हैं। लेकिन ये तमाम कोशिशें नाकाफी साबित हो रही है। ऐसा इसलिये, क्योंकि जल संरक्षण मुहिम भविष्य को सुरक्षित करने के लिये अहम है। बावजूद उस दिशा में जमीनी अमल नगण्य है या यूं कहें कि प्रयास ना के बराबर है, जो कहीं ना कहीं चिंता का विषय है। प्राप्त जानकारी के अनुसार एक तरफ जहां बढ़ती गर्मी ने आम जनमानस को हलाकान कर रखा है, वहीं भू-जलस्तर भी लगातर नीचे लुढ़क रहा है। जिसे लोग जल संकट की आहट बता रहे हैं। इसकी मुख्य वजह शहर के कई इलाकों में जहां टयूबवेल का वॉटर लेवल डेढ़ से नीचे पहुंच चुका है। वहीं वैकल्पिक व्यवस्था में रूप में लगे हेंडपंप भी दम तोड़ रहे हैं। ऐसे में आगामी मई और जून को लेकर अभी से चिंता के बादल हैं।

दोहन बरकरार , उपाय नगण्य

जानकारों की मानें तो विगत वर्षो की तुलना इस बार जलस्तर ने समय से पहले खतरे की घंटी बजा दी है। इसके पीछे जिम्मेदारों का उदासीन रवैया उजागर होता है। क्योंकि, बढ़ती आबादी के बीच पानी का दोहर बरकरार है या यूं कहें कि पहले से बढ़ गया। वहीं जल संरक्षण के उपाय पहले की तुलना अब भी कछुआ चाल चल रहा है।

ना के बराबर वॉटर हार्वेस्टिंग

यह भी मालूम हुआ कि बड़े-बड़े निर्माण कार्यो समेत अन्य आबादी क्षेत्रों में वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम ना के बराबर है। जहां सिस्टम है, वहां सार्थक परिणामों का टोटा है। क्योंकि, कई स्थानों पर सिस्टम के बावजूद छत का पूरा पानी जमीन में नही उतर रहा है। इसके अलावा कई स्थानों पर पानी व्यर्थ बहते देखा जा सकता है, जो कई सवाल खड़े करता है।

 

उधर, नदी-नालों में बह उठी धार

इन सबके बीच ग्रीष्मकालीन मूंग के लिये नहर में छोड़ा गया पानी जलस्त्रोतों के लिये मददगार साबित हुआ है। दरअसल, नहर का पानी नदी-नालों समेत अन्य जलस्त्रोतों तक पहुंच गया है। जिसके चलते जलस्त्रोतों में जान आ गई है। किसानों के मुताबिक 15 दिन पहले नदी दिन व दिन सूख रही थी। लेकिन नहर आने से पानी की धार बह उठी है।

यह उपाय जरूरी…

– घर की छत का पानी एक स्थान पर उतारे

– जरूरत अनुरूप पानी का इस्तेमाल करें

– पानी को व्यर्थ बहने से बचायें

– जलस्तर बनाए रखने बोरी-बंधान

201 Views

Leave a Reply

error: Content is protected !!