गणेश पांडे, भोपाल। धार्मिक स्थलों पर प्रदेश के जंगलों में वनवासियों के आवाजाही को निर्बाध रूप से जारी रखने के लिए राज्यपाल मंगु भाई पटेल ने निर्देश दिए हैं। अब राज्यपाल के निर्देश का पालन कराने पर वन विभाग के आला अफसर असहज महसूस कर रहें है, क्योंकि केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए फारेस्ट एक्ट के प्रावधान आड़े आ रहें है। राज्यपाल ने ये निर्देश पिछले दिनों राजभवन में सम्पन्न जनजातीय प्रकोष्ठ की बैठक में दिए हैं। सूत्रों ने बताया कि राज्यपाल पटेल वनाधिकार के तहत वनवासियों को जंगलों के अंदर बने उनके धार्मिक स्थलों तक आने-जाने के लिए सामुदायिक अधिकार दिलवाना चाहते हैं। हालांकि इस निर्देश से वन विभाग असहज है। दरअसल वन विभाग ने काफी समय पहले से टाईगर रिजर्व में आने वाले धार्मिक स्थलों का सर्वे कर उन्हें चिन्हित किया हुआ है तथा विभिन्न अवसरों या तिथियों पर इनमें मेले आदि हेतु आवाजाही के लिए वनवासियों को जंगल में प्रवेश की अनुमति दी हुई है। लेकिन अब वन और अभयारणयों एवं वनमंडलों के पुरानें एवं नए धार्मिक स्थलों में आने-जाने के लिए यह अनुमति मांगी जा रही है। यहां तक कि नौरादेही अभयारण्य के अंदर से कांवड़ यात्रा निकालने की अनुमति मांगी जा रही है। इससे वन विभाग असहमत है। अब चूंकि राज्यपाल ने इस आवाजाही को निर्बाध करने के निर्देश दिए हैं, इसलिये इस कार्य को कैसे किया जाए, इस पर वन विभाग के आला अफसर मंथन कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि वनों एवं वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए वन विभाग विभिन्न वन कानूनों के तहत प्रवेश नियंत्रित करता है। ऐसा ही सामुदायिक अधिकार वनवासियों को जंगल के अंदर से उनके हाट बाजार, अंत्येष्टि स्थल आदि तक जाने का देने के भी निर्देश दिए गए हैं।


