क्यों हुए इतने भीषण धमाके

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अनोखा तीर, हरदा। 40 किलोमीटर दूर तक धमाकों की आवाज, धुएं का उठता हुआ गुब्बार जो शहर को ढक ले, लोगों के घरों में भूकंप जैस झटके, बर्तन नीचे फिकाने लगे। यह सब कोई छोटी पटाखा फैक्ट्री में आग लग जाए तो नहीं हो सकती। यह सब तो तभी हो सकता है जब किसी बारूद के बड़े भंडार में भयंकर विस्फोट से। मंगलवार को जो हरदा की इस पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट हुआ वह कोई छोटा मोटा विस्फोट नहीं था, बल्कि बारूद के गोदाम में हुआ बड़ा विस्फोट था, जिसकी गूंज ४० किलोमीटर के क्षेत्र में गूंजी और हरदा क्षेत्र की धरती कांपने लगी। आग पर जब काबू पाया गया तो देखा कि इस भयानक विस्फोट से ४ मंजिला पक्की इमारत पूरी तरह मलवे में तब्दील हो गई और १-१ कि.मी दूर तक इस पक्की इमारत के अवशेष उड़कर पहुंचे। अनोखा तीर ने जब फटाका फैक्ट्री में हुए ब्लास्ट के संबंध में वहां पर जो काम कर रहे थे और जो किसी तरह से बच गए उनसे जानकारी ली तो कई चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। पहली बात तो यह थी कि छोटी सी फैक्ट्री के लाइसेंस वाली जिसे केवल 15०० किलो बारूद रखने का ही लायसेन्स ही था। इस फैक्ट्री में लगभग 600 से 700 अकुशल मजदूर काम करते थे जिसमें महिलाओं और बच्चों की संख्या सबसे अधिक थी। इस फैक्ट्री में तलघर सहित चार मंजिल में पटाखे बनाने का काम होता था। नीचे तलघर में बारूद का अथाह भंडार था। यहीं पर बारूद को पीसने के लिए चक्की भी स्थापित की गई थी। नंगे पैरों से दिनभर यहां पर मजदूर काम करते थे। ऊपर के तीन मंजिल में महिला एवं बच्चे पटाखे बनाने का काम करते थे। काम करने वाले बच्चों और महिलाओं को प्रतिदिन के हिसाब से 500 रुपए की मजदूरी दी जाती थी। फैक्ट्री का मालिक हर महीने लगभग 1 करोड रुपए का भुगतान अपने दैनिक मजदूरों को करता था। वहां काम करने वाले मजदूरों का कहना है कि तलघर में इतना बारूद था कि उससे कई शहर तबाह हो सकते थे। उनकी इस बात का पहले तो हमें विश्वास नहीं हुआ, लेकिन जब हमने आंकलन किया तो उनकी बात 100 फ़ीसदी सच नजर आई, जो व्यक्ति प्रतिदिन 3 लाख रुपए मजदूरों को मजदूरी दे रहा है तो वह व्यक्ति 5 लाख के पटाखे तो प्रतिदिन बनवाता ही होगा। इस फैक्ट्री संचालक राजू अग्रवाल के यहां पर सिर्फ सुतली बम बनाने का ही काम होता था। एक सुतली बम की जब हमने होलसेल में प्राइस पता की तो फटाका व्यवसाययों ने बताया कि 2 से लेकर 4 रुपए तक सुतली बम थोक में मिलता है, इस हिसाब से देखें तो लगभग 2 लाख सुतली बम रोज इस फैक्ट्री में तैयार किए जाते थे। यदि एक सुतली बम में 5 ग्राम भी बारूद भरा जाता है तो 200 सुतली बम में लगभग 1 किलो बारूद लग जाएगा और 2 लाख सुतली बम यदि रोज बनते थे, तो इसमें कितना अथाह बारूद लगता होगा, इसका आंकलन आप आसानी से कर सकते हैं। यह फटाका व्यवसायी कोई रोज तो बारूद बुलाता नहीं होगा। इसके पास कम से कम एक माह का स्टॉक तो होता ही होगा, तो आप सोच सकते हैं कि कितने टन बारूद इसके तलघर में होगा। जिसने कुछ ही मिनट में पूरी तीन मंजिल इमारत को खाक में मिला दिया। अब देखने वाली बात यह होगी कि इसे इतने बड़े पैमाने पर बारूद का स्टॉक करने की किसने परमिशन जारी कर दी। यह कहां से इतना बारूद खरीदकर कारोबार कर रहा था। सूत्रों से यहां तक ज्ञात हुआ है कि यह खदानों और कुओं में ब्लास्टिंग के लिए उपयोग की जाने वाली जिलेटिन की छड़ों का भी विक्रय अवैध रूप से करता था। यह सब जांच की बातें हैं, जांच होती रहती हैं नतीजा सबको पता होता है। ताजा-ताजा मामला है, सब इसकी चर्चा करेंगे और कुछ ही दिन में हो सकता है कि फिर से यही फटाका व्यवसायी दुगने स्तर पर अपने कारोबार को पुन: प्रारंभ कर दे।

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