ग्वालियर। गुना बस हादसे में जिंदा जले यात्रियों की हृदय विदारक मौत के बाद प्रदेश के अधिकारियों की नींद टूटी है। जो बसें नियम तोड़कर यात्रियों व सड़कों पर चलने वाले लोगों के लिए खतरा बनकर दौड़ रहीं थीं, उनकी गुरुवार को जमकर धरपकड़ की गई। नियम तोड़ने वाली यात्री बसों की ओर मुड़कर भी न देखने वाले जिम्मेदार अफसरों ने अब सीएम की सख्त रुख के चलते ही एक ही दिन में 136 बसों की जांच कर डाली।
शहर में चार स्थानों पर यह जांच की गई, जिनमें 56 बसों पर जुर्माना भी ठोका गया। किसी 30 सीटर बस में 55 यात्री सवार थे तो कई बसें बिना परमिट और बिना फिटनेस के दौड़ रहीं थीं। ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग के अधिकारियों ने यह कार्रवाई की। पुलिस ने 100 बसें जांचीं तो आरटीओ ने 36 बसों को रोका। एक बस जब्त भी की गई।
हर रोज जान से खिलवाड़
ग्वालियर में विवेकानंद चौराहा, गोला का मंदिर चौराहा और कंपू में बसों की चेकिंग की गई। यात्री और स्कूल बसों की जांच के लिए छह टीमें लगाई गई थीम। डीएसपी अजीत सिंह चौहान, ट्रैफिक प्रभारी हिमांशु तिवारी, अभिषेक रघुवंशी और सोनम पाराशर व इनकी टीम ने जांच शुरू की। पूरे दिन में करीब छह घंटे तक ट्रैफिक पुलिस ने बसों की जांच की।
झांसी रोड इलाके में तिवारी ट्रैवल्स की बस रोकी गई, इसमें मवेशियों की तरह यात्रियों को भर रखा था। बस चालक ने पहले तो रोका ही नहीं, पीछा कर बस रुकवाई, इसके बाद यात्रियों को नीचे उतरवाया तो इसमें 55 लोग निकले, जबकि बस की क्षमता 30 यात्रियों की है। बस चालक का चालान बनाया गया। कुछ बसें बिना परमिट दौड़ रही थीं। जो स्कूल बस निर्धारित गति से अधिक गति में दौड़ती पाई गईं, उनपर भी कार्रवाई की गई। एक बस के टायर पूरी तरह घिस चुके थे, बस की हालत भी बहुत ही जर्जर थी। बस में सवार यात्रियों को उतारकर दूसरी बस में शिफ्ट किया गया।
शिवपुरी लिंक रोड: अब निकले आरटीओ
शिवपुरी लिंक रोड पर आरटीओ एचके सिंह ने विभाग के अमले के साथ यात्री बसों की चेकिंग की। कुल 36 बसों को रोका गया, जिनमें दो बसों के बाद फिटनेस नहीं थी, उनपर पांच पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया, इसके अलावा कई बसों में कमियां भी पाईं गईं। आरटीओ एचके सिंह ने बताया कि बसों को रोजाना जांचा जाएगा, एसएसपी से चर्चा कर ली गई है, पुलिस व परिवहन संयुक्त अभियान चलाएंगे।
परिवहन विभाग
ग्वालियर में परिवहन का मुख्यालय होने के बाद भी मैदानी स्तर पर कितनी कार्रवाई होती है यह सबको पता है। अब हादसा हो गया तो आरटीओ एचके सिंह ने अमले के साथ एक ही दिन में 36 बसों को जांच लिया, पहले से प्रभावी कार्रवाई जारी रहे तो हादसों की नौबत न आए, लेकिन अधिकारी दफ्तरों से निकलते नहीं हैं। मुख्यालय भी ध्यान नहीं देता।
ट्रैफिक पुलिस
शहर के यातायात के साथ यात्री सुरक्षा भी अहम है, लेकिन चालानी कार्रवाई के अलावा पुलिस कुछ नहीं करती है, अब बस हादसा हुआ तो तीन जगहों पर 100 बसें पकड़ डाली, हर रोज अगर छोटे अनुपात में कार्रवाई हो तो सुधार दिख सकता है। डीएसपी ट्रैफिक अजीत चौहान से लेकर ट्रैफिक प्रभारियों को सामान्य दिनों में कोई मतलब नहीं रहता।
बस आपरेटर
कितना भी बड़ा हादसा हो जाए इन्हें फर्क नहीं पड़ता है, बिना परमिट, टैक्स व बीमा के बस यात्री किराया आना चाहिए। इनकी बसों को जब्त करने से लेकर एफआइआर की कार्रवाई न पुलिस करती है न परिवहन विभाग अनुशंसा करता है, इसलिए नियम न मानने वाले आपरेटरों के हौसले बुलंद हैं।
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