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Friday, 30 October 2026
मध्य प्रदेश

गीता के प्रचार के लिए अनोखा अभियान, 25 साल में 75 हजार लोगों को भेंट की श्रीमद्भगवद्गीता

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शहडोल। सनातन धर्म का स्वरूप धार्मिक पुस्तक ’गीता’ को न केवल भारत बल्कि विश्व में सम्मान मिलता है। यह पुस्तक सर्वमान्य है और इसका ज्ञान जिसके मन में धारण हो गया उसका कल्याण हो जाता है। शहडोल जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर काटकोना नाम के एक छोटे से गांव में मानव कल्याण आश्रम के माध्यम से पिछले 28 सालों से लगातार गीता का ज्ञान लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। यह काम कर रहे हैं इस आश्रम के संस्थापक सदस्य पंडित श्रीकांत शर्मा, जिनको लोग गीतानुरागी के नाम से भी जानते हैं।

श्रीकांत शर्मा सरकारी शिक्षक हैं और बचपन से ही गीता पढ़ने और गीता के ज्ञान को लोगों तक पहुंचाने का यह काम करते चले आ रहे हैं। 1997 में स्वामी सच्चिदानंद सरस्वती से ज्ञान की प्राप्ति करने के बाद गीता के ज्ञान के प्रचार में इन्होंने तेजी लाई। गुरु जी के ब्रह्मलीन होने के बाद उन्होंने अपने इस प्रचार प्रसार के काम को और तेज कर दिया। इस तरह से अब तक इन्होंने 75 हजार लोगों तक गीता पहुंचाकर सनातन की पताका फहराने का काम किया है।
शुरुआत इस तरह से हुई

श्रीकांत शर्मा बताते हैं कि वह जहां भी जाते हैं अपने थैले में और अपने वाहन में गीता पुस्तक जरूर रखते हैं, जिससे भी वह भेंट करने जाते हैं उनको लाल रंग की थैली में गीता रखकर भेंट करना नहीं भूलते हैं। उन्होंने बताया की शुरुआत में जब उनका वेतन 700 रूपए थी तब वह हर माह 100 रूपए गीता की पुस्तक खरीदने के लिए खर्च करते थे और उस समय गीता की पुस्तक 5 रुपए में मिल जाती थी।

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