अनोखा तीर, हरदा। सोनतलाई मार्ग स्थित रेवापुर में स्व.रामलाल पटेल की पुण्य स्मृति में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा शुरू करने से पहले रेवापुर में कलश यात्रा निकाली गई। नीमगांव स्थित श्रीगुरु जम्भेश्वर मंदिर में उत्तराखंड हरिद्वार से आए प्रसिद्ध कथा वाचक राजेंद्रानंद महाराज का विश्नोई समाज के पदाधिकारियों व अन्य लोगों ने स्वागत किया। इसके बाद सभी कथास्थल रेवापुर के लिए वाहनों के काफिले के साथ रवाना हुए। कथा वाचक राजेंद्रानंद महाराज ने कथा का वाचन करते हुए कहा कि भगवान की कथा हमारे अंदर सुंदर विचार, आचार और आचरण का निर्माण करती है। भावगत कथा को आध्यात्म दीप कहा गया है। कथा अज्ञानी को ज्ञानी बनाने की एक विधा है। यह पापी आत्मा को पुण्यात्म बना देती है। भगवान की कथा के पांच नियम बनाए गए हैं। उत्तम संगति जीवन में आ जाए तो सब कुछ उत्तम हो जाएगा। भगवान श्रीगुरु जम्भेश्वर ने भी अपने शब्दों में कहा है कि भले लोगों के साथ बैठोगे को विद्वान बनोगे। अच्छे चरित्र के लोगों के साथ संगति करोगे अच्छे बनोगे। मप्र वीरों, संगीत, वीरों और सतियों की भूमि है। यह साधन संपन्न क्षेत्र है। गुरु जम्भेश्वर ने कि कभी भी ओछे कर्म नहीं करना। कभी ओछी वाणी मत बोलना। इससे सद्गति में रुकवाट आएगी। श्रद्धावान बनो। शास्त्रों का अवलोकना करना चाहिए। प्रतिदिन ज्ञानवर्धक ग्रंथों का अध्ययन करे। ज्ञानवर्धक पुस्तकों को पढ़ना चाहिए। गीताजी में भी कहा गया है कि जिसके पास मन की पवित्रता है वह जीवन में सफल होता है। सत्संग सुनने से भी मन की पवित्रता आएगी। भगवान की मंगलमय कथा का श्रवण करना चाहिए। कम समय में भागवतजी नहीं होती है। इसलिए इस कथा का समय दोपहर बारह से शाम चार बजे तक किया जाता है, जिससे कि भागवतजी का विस्तार से वर्णन संभव हो सकेगा। यह कथा जो आप करा रहे हो कि वह अपने कुल की पवित्रता के लिए कराई जा रही है। अगर संत चिंता भी करता है तो किसी ओर की करता है। संत कभी खुद की चिंता नहीं करता। जिसके जीवन में ज्ञान का प्रकाश और संयम का ब्रेक न हो उसका जीवन सही दिशा में नहीं जा सकता। कथा सुनने के लिए सैकड़ों की संख्या में महिला व पुरुष पहुंचे।

