गेहूं की फसल में जड़माहू कीट से बचाव के लिए सलाह

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अनोखा तीर, हरदा। रबी मौसम अंतर्गत जिले में कृषको द्वारा गेंहू, चना, सरसों, मक्का एवं मटर आदि फसलों की बोनी की गई है। सहायक संचालक कृषि विभाग अखिलेश पटेल ने कृषकों को सलाह दी है कि गेहूं फसल के खेतों में स्थान-स्थान पर पौधे पीले होकर जड़माहू कीट का प्रकोप है। जो पौधे के जड़ भाग में चिपका रहता है, निरन्तर रस चूसकर पौधे को कमजोर कर सुखा देता है। प्रभावित खेतों में पौधे को उखाड़कर ध्यान से देखने पर बारीक-बारीक हल्के पीले, भूरे व काले रंग के कीट चिपके हुए दिखाई देते हैं। मौसम में उच्च आर्द्रता व उच्च तापमान होने पर यह कीट अत्यधिक तेजी से फैलता है। जड़ माहू कीट नियंत्रण के लिए कृषक भाई इमिडाक्लोरोप्रिड 17.8 प्रतिशत, 40 एमएल या क्लोरोपायरिफोस 25 इि.सी, 600 एमएल प्रति एकड़ मात्रा का 100 से 125 लीटर पानी का घोल तैयार कर छिड़काव करें। श्री पटेल ने बताया कि चना एवं गेहूं फसल में इल्ली प्रकोप के लिए कीटनाशक इमामेक्टीन, 80 ग्राम प्रति एकड़ या इन्डोक्साकर्ब, 110 ग्राम प्रति एकड़ मात्रा का 100 से 125 लीटर पानी का घोल तैयार कर छिड़काव करें। चना एवं गेहूं दोनो फसलों में फफूंदजनित बीमारियों के नियंत्रण के लिए टेब्यूकोनाजोल सल्फर, 400 ग्राम या थायोफेनेट मिथाइल मेनकोजेब, 200 ग्राम प्रति एकड़ की अनुशंसित मात्रा का 100 से 125 लीटर पानी का घोल तैयार कर छिड़काव करें।

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