झाबुआ, बामनिया- पिता की चिंता में मुखाग्नि सिर्फ बेटा ही दे सकता है। बेटियां चिता को आग नहीं लगा सकती। इस सामाजिक सोच से ऊपर उठकर बामनिया नगर में एक बेटी ने न सिर्फ पिता की अंतिम यात्रा में कंधा लगाया। बल्कि श्मशान घाट पर जाकर मुखाग्नि देकर अपना फर्ज अदा किया।
श्यामलाल परमार उज्जैन के निवासी थे। पिछले कोरोना काल में उनकी धर्मपत्नी और बेटे का देहांत हो चुका था। इसके बाद बेटी सीमा व उसका पति जितेश परमार उन्हें अपने साथ ही रहने के लिए लेकर आए थे। करीब 3 वर्ष से अधिक सेवा की। श्यामलाल की साइलेंट अटैक से मौत हो गई।
अंतिम संस्कार हुआ। बेटी सीमा ने उन्हें कंधा भी दिया। उन्हें श्मशान में मुखाग्नि देकर अपना फर्ज निभाया। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि श्यामलाल परमार धार्मिक एवं शांति प्रिय व्यक्ति थे। वह हर रोज नगर के मंदिरों में दर्शन करने के लिए नित्य समय पर जरूर जाते थे। बेटी सीमा परमार ने भी बाप की खूब सेवा की। उन्होंने यह भी साबित कर दिया कि बेटा-बेटी में कोई अंतर नहीं है।
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