उज्जैन- जिले में सड़क हादसों में लोगों के असमय मौतों का सिलसिला जारी है। बीते तीन सालों में साढ़े तीन हजार हादसों में 733 लोगों की जान चली गई हैं। इनमें से ज्यादातर मौतें तेज रफ्तार व बगैर हेलमेट के कारण हुई हैं। बीते दस माह में यह आंकड़ा बढ़ गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह चिंता का विषय है।
उज्जैन में महाकाल महालोक बनने से यातायात काफी बढ़ गया है। रोजाना हजारों वाहन शहर में प्रवेश कर रहे हैं। वाहनों के साथ ही सड़क हादसों की संख्या में भी लगातार इजाफा हो रहा है। उज्जैन की 300 किमी लंबी सड़क पर 34 खतरनाक मोड़, गड्ढे और 26 ब्लैक स्पाट हैं। इन सड़कों पर बीते तीन वर्षों में हुए 3496 सड़क हादसों में 733 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और 4444 लोग गंभीर घायल हुए हैं।
यातायात नियमों का पालन करवाना जरूरी
इन मार्गों को सुधारने के साथ ही यातायात नियमों का पालन करवाना जरूरी है। सड़कों पर स्पीड ब्रेकर भी तकनीकी मापदंड अनुसार नहीं बने हैं। मुख्य मार्गों पर भी संकेतक बोर्ड की कहीं नजर नहीं आते हैं। यातायात डीएसपी विक्रम कनपुरिया ने बताया कि उज्जैन की सड़कों को अगले 15 वर्षों तक जाम से मुक्त रखने के लिए ट्रैफिक मोबिलिटी प्लान बनाया जा रहा है। शहर के 17 चौराहों एवं तिराहों की बाएं मोड़ की बाधा हटाने के साथ ही उनके सौंदर्यकरण का कार्य भी किया जाएगा। यातायात सुधार के लिए शहर में रोज 400 से अधिक लोगों के ई-चालान बनाए जा रहे हैं। यह चालान, उन लोगों के बन रहे है जो ट्रैफिक सिग्नल पर लाल बत्ती चालू होने पर भी रोड क्रास करते हैं, ट्रिपल राइडिंग करते हैं।
यह भी चिंताजनक
बीते तीन साल में सबसे ज्यादा सड़क हादसे इसी साल हुए हैं। वर्ष 2021 में 1229 सड़क हादसे हुए थे। इनमें 214 लोगों की मौत हुई थी तो वहीं 1207 लोग घायल हुए थे। वर्ष 2022 में हादसों की संख्या बढ़कर 1550 हो गई थी। इनमें मृतकों की संख्या 235 तथा घायलों की संख्या 1616 थी। जबकि इस वर्ष 2023 में बीते दस माह में हादसों की संख्या 1717 पहुंच गई है। मरने वालों की संख्या 284 तथा घायलों की संख्या 1621 है। जबकि साल खत्म होने में अब भी दो माह बाकी है।
रोजाना 60 हजार से ज्यादा वाहन करते हैं प्रवेश
शहर की सड़कों को ट्रैफिक जाम से मुक्त करने के लिए अर्बन मास ट्रांजिट कंपनी अपनी सर्वे रिपोर्ट में बताया है कि उज्जैन शहर में रोजाना चार लाख 81 हजार लोगों का आवागमन होता है। दो पहिया, चौपहिया मिलाकर 60 हजार वाहन प्रवेश करते हैं। इनके लिए सुव्यवस्थित ट्रैफिक प्लान जरूरी है।
निर्देशों का भी नहीं हो रहा पालन
सड़क सुरक्षा समिति ने बसों का फिटनेस नियमित जांचने, चरक अस्पताल और इंदौर गेट रेलवे स्टेशन के सामने बसों के मनमाने स्टापेज पर रोक लगाने के निर्देश दिए थे। इसके अलावा चामुंडा माता चौराहे पर बस चालक द्वारा बीएसएनएल अधिकारी को कुचलने के बाद एएसपी जयंत राठौर ने भी बस चालकों की मीटिंग कर स्टापेज पर रोक लगाने को कहा था। मगर इस निर्देश का पालन होता नजर नहीं आता। परिवहन विभाग भी बसों का फिटनेस, चालकों का लाइसेंस समय-समय पर नहीं जांचता है।
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