लुटती रही जनता, सोती रही पुलिस.. बदनामी से बचने केस दर्ज ही नहीं किए

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ग्वालियर- देशभक्ति जनसेवा मप्र पुलिस का आदर्श वाक्य। यहां जनसेवा से आशय है- आम लोगों की सुरक्षा, गुंडे-बदमाशों से उनकी रक्षा और गुंडों को उनकी सही जगह पहुंचाना। मप्र का ग्वालियर जिला.. यहां पुलिस के लिए जनता की सुरक्षा बाद में है, पहले अपनी चिंता जरूरी है। अमूमन अपराध होता है, अपराध होते ही पुलिस का पहला टारगेट होता है- अपराधी को पकड़ना, अपराधियों को पकड़कर आगे अपराध होने से रोकना। ग्वालियर में लूट की वारदात होती रहीं, जनता लुटती रही, लेकिन पुलिस का पूरा फोकस बदमाशों को रोकने पर नहीं बल्कि इस पर था- किसी भी तरह फरियादी एफआइआर ही न कराए। यही हुआ भी, लगातार करीब दो माह तक शहर में लूट की ताबड़तोड़ वारदात हुईं और पुलिस बदनामी से बचने के लिए घटनाएं ही दबाती गई। लुटेरों के हौसले बुलंद होते गए और एक के बाद एक लूट की घटनाओं ने शहर में सुरक्षा-व्यवस्था को ही कठघरे में खड़ा कर दिया। शहर के अलग-अलग थानों की यह कारगुजारी तब उजागर हुई, जब बीते रोज हजीरा में नगर पालिका उपाध्यक्ष का मंगलसूत्र लूटने वाली गैंग पकड़ी गई। लुटेरों ने पुलिस की पोल खोल दी और 12 लूट की वारदात कुबूल कर लीं। करीब आधी वारदातों में एफआइआर नहीं हुई थी।

पुलिस की कारगुजारी.. यहां भी छिपाई थी घटना

सिटी सेंटर इलाके में डीआरडीइ के पूर्व डायरेक्ट की साली का मंगलसूत्र बाइक सवार लुटेरे लूट ले गए। द्य इंदरगंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत राम मंदिर के पास बाइक सवार बदमाश मोबाइल लूट ले गए, फरियादी को थाने से लौटा दिया गया था।

यहां हुई थी लूट की वारदातें

शहर के हजीरा, सिरोल और महाराजपुरा में लूट की एक-एक वारदात हुईं। थाटीपुर में चार, मुरार में तीन और गोला का मंदिर में लूट की दो वारदात हुईं थीं।

अफसरों तक फरियादी की पहुंच होने पर हो रही सुनवाई

जिन मामलों में सीधे वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक शिकायत पहुंची, तभी थानों के स्टाफ ने सुनवाई की। ग्वालियर में अब आम लोग तक कहने लगे हैं- अफसरों तक पहुंच हो तभी एफआइआर होगी। इसका मतलब है कि अधिकारी से फरियादी की पहुंच होने पर ही थाने के अधिकारी कार्रवाई करते हैं। इन थानों ने दबाई घटना द्य थाटीपुर द्य मुरार द्य गोला का मंदिर द्य सिरोल

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