अनोखा तीर, हरदा। रबी सीजन में गेहूॅ-चना समेत अन्य फसलों की बुआई के लिये सिंचाईं कार्य रफ्तार पकड़ चुका है। यही रफ्तार तब ओर अधिक बढ़ी, जब जिले की समस्त नहरों में पानी पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है। हालांकि इसे किसान की सक्रियता कहेंगे या फसल उत्पादन के प्रति उनकी सजगता, जो कि समय से पहले उनके खेत पानी से तरबतर हो गए हैं। वहीं बड़े रकबे में अब भी दिनरात पानी चल रहा है। ये सब किसानों के निजी जलस्त्रोतों से संभव हुआ है। इससे स्पष्ट होता है कि जिले के किसान कृषि को लेकर कितने गंभीर हैं। उनकी यही सूझबूझ क्षेत्र को कृषि के मामले में अव्वल बनाती है। दरअसल, जिले में रबी सीजन का आगाज होने के साथ ही सिंचाईं कार्य ने जोर पकड़ लिया था। खासकर चना उत्पादक किसानों को अक्टूबर माह के अंत में बुआई जरूरी है। क्योंकि, चना बुआई का यही सही वक्त है। हालांकि, क्षेत्र में चना 10 से 15 नवम्बर तक बोया जाता है। इस लिहाज से क्षेत्र में चने का करीब 80 प्रतिशत रकबा पानी से तरबतर यानि पलेवा पूर्ण हो चुका है। वहीं कई रकबो में चना की बुआई हो चुकी है।
कम सिंचाईं में मोटा मुनाफा
उल्लेखनीय है कि क्षेत्र में चना फसल का ग्राफ साल दर साल बढ़ रहा है। इसकी दो मुख्य कारण हैं। पहला चना कम सिंचाईं की फसल हैं, वहीं समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीदी दौरान उसका बेहतर दाम भी मिलता है, जो कि किसानों के लिये आर्थिक रूप से फायदेमंद है।
नई-नई वैरायटियों पर दांव
यह भी बता दें कि बीतें दो साल पहले तक क्षेत्र में लाल चना ज्यादा बोया जाता था। जबकि जबकि डॉलर और काटू चना की न्यूनतम रकबे में बुआई होती थी। लेकिन अब इसका उलट हो गया है, जब अधिकांश किसान इस साल डॉलर और काटू पर दांव लगा रहे हैं।
इनकी सर्वाधिक डिमांड ….
डॉलर चना — काटू चना
७२ गोल्ड — आरजीबी २०२
आरजीबी २०४ — जेजे १३०
चनी जेजे ३६ — जॉकी ९२१८
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