ग्रामीणों की कलेक्टर से गुहार
अनोखा तीर, हरदा। कलेक्टर साहब सरकार आखिरी छोर तक के व्यक्ति का विकास करने की बात कर रही है। हमें तो पता नहीं यह आखिरी छोर कहां है, लेकिन इतना तो समझ में आता है कि आखिरी छोर पर जाने के लिए निकलते तो पहले से ही होंगे। साहब जी हमारा गांव सबसे पहले ही पड़ता है। यह तो हरदा जिला मुख्यालय से मात्र ढाई किलोमीटर दूर ही है। लेकिन साहब हमको और कोई विकास फिकास नहीं चाहिए, बस इतना कर दो कि हमारे गांव में अगर कोई मर जाएं तो उसको जलाने की थोड़ी सी जगह दे दो साहब। हमारे गांव से हरदा के बीच दो दो नदियां पार करना पड़ता है और उनके पुल भी बहुत नीचे हैं। जरा सी बारिश हुई की पानी पुल के उपर, अब आप ही बताओ ऐसे में मुर्दे को लेकर नदी पार करने में कहीं जिंदा बह गए तो। अगर यह समस्या नहीं होती तो साहब हम तो हरदा लाकर भी जला देते। साहब जी जब तक मुक्तिधाम की व्यवस्था नहीं हो तब तक ऐसा कोई कानून लागू कर दीजिए कि हमारे गांव में कोई मरे ही नहीं। ओ फिर जैसे ही आप मुक्तिधाम बनवा दोगे कसम से वह सारे बुढ्ढे आपका मृत्यु प्रतिबंधात्मक आदेश समाप्त होते ही फटाफट खुद ही चलकर मुक्तिधाम आ जाएंगे। लेकिन साहब अभी की स्थिति में तो बरसात में मरना नहीं पूराता। और नहीं तो साहब गेहूं चना रखने के लिए जैसे आपने वेयरहाउस खुवला रखें है ऐसे ही हमारे गांव में मुर्दा रखने के लिए कोई व्यवस्था करवा दीजिए। जैसे ही बरसात खत्म होगी, सारे मुर्दे एक साथ जला देंगे। आप तो बड़े साहब हो सब-कुछ कर सकते हो, हमारे लिए इतना तो कर ही सकते हो ना साहब? हमारे गांव में सरकारी जमीन तो खूब थी पर सब चोरी हो गई। अब वह कौन कौन ने चुराई यह तो आपका पटवारी जी ही बता सकते हैं। हमारे गांव में साढ़े पांच फीट से उंचा कोई भी आदमी लुगाई नहीं है अगर एक छोटा टुकड़ा भी मिल जाए तो उतने में हम जला लेगे। हम गांव वालों की इतनी गुहार तो सुन लीजिए सरकार। हम खाद, पानी, सड़क, बिजली जैसी कोई चीज नहीं मांग रहे, यह नहीं भी होगा तो इससे ज्यादा कुछ नुकसान नहीं होगा साहब। क्योंकि अगर कुछ भी नहीं मिला तो फिर मरना ही पड़ता है और हमारी तो समस्या ही मरने के बाद की है। अगर मर गए तो जलेंगे कहां? साहब हमारी इतनी समस्या दूर कर दोगे तो हम पूरे गांव वासी रुपीपरेटिया से आपके दफ्तर तक नंगा पांव आपकी जय-जयकार करते हुए आएंगे। तो साहब फिर आने वाली बरसात के पहले हमारा मुक्तिधाम बन जाएगा क्या? और नहीं तो फिर कोटवार को बोलकर डोडी जरुर पिटवा देना कि कलेक्टर साहब के आदेशानुसार आज से चार महीने बरसात के चलते रुपीपेटिया में किसी भी ग्रामीण के मरने पर प्रतिबंध लगाया जाता है।

