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Thursday, 29 October 2026
मध्य प्रदेश

कमलनाथ ने चुनाव आयोग से किया मनरेगा मजदूरों को भुगतान करने की अनुमति देने का आग्रह, शिवराज सरकार पर आरोप

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कमलनाथ ने कहा है कि मध्य प्रदेश में लंबे समय से मनरेगा में काम करने वाले मजदूरों को मजदूरी नहीं मिली है। उन्होने शिवराज सरकार पर आरोप जड़ा कि उनकी सरकार एक तरफ तो लगातार कर्ज ले रही है, वहीं मजदूरों और गरीब तबके को उसके हक का पैसा नहीं दिया जा रहा है। इसी के साथ उन्होने चुनाव आयोग से भी आग्रह किया है कि आचार संंहिता लग चुकी है, लेकिन मजदूरों को उनकी मेहनत का पैसा देने की अनुमति दी जाए।

मनरेगा मजदूरों को भुगतान की मांग

ट्वीट करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने लिखा है कि ‘मध्य प्रदेश में करीब 10 हफ्ते से मनरेगा में काम करने वाले श्रमिकों को उनकी मजदूरी नहीं मिली है। त्योहार के मौसम में मजदूरों के साथ इस तरह का व्यवहार अमानवीय है। मैं शिवराज जी से जानना चाहता हूं कि उनकी सरकार लगातार कर्ज लेती रही है और आचार संहिता के दौरान भी कर्ज लेने की तैयारी चल रही है। जब लाखों मनरेगा श्रमिकों को उनकी मजदूरी नहीं दी जा सकती तो आखिर यह कर्ज किस चीज के लिए लिया जा रहा है। शिवराज जी गरीबों के मुंह से निवाला छीनने से बड़ा पाप और कुछ नहीं है। मैं माननीय निर्वाचन आयोग से भी आग्रह करता हूं कि आचार संहिता के बावजूद श्रमिकों की मजदूरी का भुगतान किया जाए, यह उनका अधिकार है।’

सबसे कम मजदूरी देने वाला प्रदेश है एमपी

बता दें कि केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2023-24 के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत एक अप्रैल से मजदूरी की दरों में संशोधन किया था। मध्य प्रदेश में उन राज्यों में शामिल था जहां सबसे कम मजदूरी 204 प्रतिदिन दी जा रही थी। संशोधन के बाद इसमें 17 रुपये बढ़ाकर 221 रुपये कर दिया गया था। हालांकि इस बढ़ोत्तरी के बाद भी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ सबसे कम मजदूरी देने वाले राज्यों में शामिल है। उसपर अगर मजदूरों को 10 हफ्ते से भुगतान नहीं किया गया है तो ये सोचने वाली बात है कि दिहाड़ी कमाई करने वालों पर क्या गुजर रही होगी। अब कमलनाथ ने उनकी मेहनत का पैसा दिए जाने को लेकर चुनाव आयोग से अनुरोध किया है।

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