
अनोखा तीर, हरदा। हजारों की संख्या में महिलाएं और पुरुष धर्म की गंगा में डुबकी लगा रहे थे, मौका था नानी बाई के मायरे का, जिसे लेकर गाजे बाजे के साथ परिवार सहित कृषि मंत्री कमल पटेल पहुंचे थे। अपनी मंत्रगुग्ध वाणी से जब जयाकिशोरी भजन की गंगा बहा रही थी, तो हर कोई उस भजन पर अपने आप को झूृमने से नहीं रोक पा रहा था। यह आयोजन था स्थानीय नेहरू स्टेडियम ग्राउंड पर तीन दिवसीय आयोजन के आज अंतिम दिवस का। खिलता कमल सांस्कृतिक मंच के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय नानी बाई का मायरा का रविवार को समापन हुआ। इस मौके पर प्रख्यात कथा वाचक जया किशोरी ने कहा कि भक्त जो भक्ति के मार्ग पर चलता है, उसे भगवान कभी भी अकेला नहीं छोड़ते। भगवान ने अपने भक्त नरसी के लिए जिस तरह उसकी बहन नानी बाई का मायरा भरने निकल पड़े। वह सिर्फ भक्ति के कारण ही संभव था। अपनी सुमधुर वाणी से जहां जयाकिशोरी ने तीन दिनों तक नानी बाई के मायरे के साथ ही ज्ञान की जो गंगा बहाई, वह एक तरह से हरदा के इतिहास में दर्ज हो गई। आयोजित इस कार्यक्रम में जयाकिशोरी जी के भजनों पर श्रद्धालु जमकर झूमे। व्यास पीठ से जया किशोरी ने कहा कि नरसी मेहता के पास अपनी बहन का मायरा भरने के लिए कोई धन नहीं था, लेकिन उनके विश्वास था कि मेरे भगवान ही सब ुकुछ करेंगे। भक्त के पास सिर्फ एक ही धन होता है और वह है भगवान की भक्ति का। किसी को उन पर विश्वास नहीं था, लेकिन नरसी मेहता को अपने भगवान पर विश्वास था। इसी के चलते वे रानी रूक्मणी के साथ सावलिया सेठ बनकर मायरा भरने पहुंचे। इस मौके पर उन्होंने सुंदर-सुंदर भजन गाए। आयोजित इस सफल कार्यक्रम के समापन अवसर पर कृषि मंत्री कमल पटेल ने जयाकिशोरी सहित सभी आने वाली धर्मप्रेमी जनता को धन्यवाद देकर अगले वर्ष फिर इसी तरह के आयोजन की घोषणा की।

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