एंबुलेंस चालक मरीजों से वसूल रहे मनमाना किराया

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 बैतूल- जिले में इन दिनों बड़ी तादाद में निजी एम्बुलेंस संचालित है। इन एम्बुलेंस द्वारा मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाकर मनमाना किराया वसूल किया जा रहा है। निजी एम्बुलेंस संचालकों द्वारा लिए जा रहे मनमाने किराए पर लगाम लगाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे है। जिला अस्पताल के आसपास हमेशा निजी एम्बुलेंस की धमाचौकड़ी बनी रहती है। जिला अस्पताल से कई मरीजों को भोपाल, नागपुर ले जाने के लिए निजी एम्बुलेंस संचालकों द्वारा मनमाना किराया वसूल किया जाता है। मरीज भी मजबूरी में अधिक राशि देने के लिए मजबूर हो जाते है।
जिला प्रशासन द्वारा निजी एम्बुलेंस के किराए को लेकर कोई गंभीरता से ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि कुछ वर्ष पहले जिला प्रशासन ने निजी एम्बुलेंस के किराए का निर्धारण किया गया था, लेकिन अब वर्षो से किराया तय नहीं हुआ है। एम्बुलेंस संचालक अपनी मर्जी से किराया वसूल कर रहे है। जानकारी के मुताबिक 50 किलोमीटर का लगभग 2 हजार रूपए तक किराया वसूल किया जाता है। अधिक किराया लेने से आम लोगों की जेब खाली हो रही है। कई सामान्य गाड़ियों को एम्बुलेंस बना दिया है, जिसमें मरीजों को लाने-ले जाने की पर्याप्त सुविधाएं भी नहीं रहती है।
 जमकर हो रही है कमीशनखोरी
निजी एम्बुलेंस संचालकों द्वारा मनमाने तरीके से किराया वसूलने का प्रमुख कारण यह भी सामने आ रहा है कि इसमें खूब कमीशनखोरी चल रही है। दलाल अस्पताल के आसपास घूमते रहते है और रेफर मरीजों को ले जाने के लिए तलाश करते है। एम्बुलेंस दिलाने के नाम पर कमीशन लिया जाता है। जिला चिकित्सालय में कई निजी एम्बुलेंस संचालक वार्डो में पहुंचकर एम्बुलेंस के लिए कार्ड वितरित करते रहते है और कहा जाता है कि कम चार्ज लेकर उन्हें अस्पताल तक पहुंचाया जाएंगा। जब मरीज जाने के लिए तैयार होते है तो उनसे अधिक राशि ली जाती है।
निजी एम्बुलेंस संचालकों ने अस्पताल के कुछ कर्मचारियों से भी संपर्क कर रखा है कि मरीज रेफर होने की स्थिति में उन्हें जानकारी दे और एम्बुलेंस उपलब्ध कराए। कर्मचारी भी कमीशन के चक्कर में निजी एम्बुलेंस संचालकों को भी मरीज के रेफर होने की जानकारी दूरभाष पर दे देते है।
 फिटनेस और रजिस्ट्रेशन को लेकर भी बना है संशय
जिले में बड़ी तादाद में निजी एम्बुलेंस वाहन संचालित है। इनके फिटनेस और रजिस्ट्रेशन को लेकर भी संशय बना हुआ है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक कुछ निजी एम्बुलेंस संचालकों के पास फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं है। परिवहन विभाग द्वारा तय की गई गाईड लाईन का एम्बुलेंस संचालक पालन नहीं कर पा रहे है। निजी एम्बुलेंस की जांच की जाती है तो कई खामियां उजागर हो सकती है। एम्बुलेंस होने के कारण टोल पर भी उन्हें बिना रोक टोक के जाने दिया जाता है।

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