श्रम न्यायालय का मामला….
अनोखा तीर, हरदा। इंदौर रोड स्थित पिड़गांव के सोयाबीन प्लांट में कार्यरत श्रमिक बीते 29 साल से अपने हक की कानूनी लड़ रहे हैं, लेकिन उन्हें अभी तक पूरी तरह से न्याय नहीं मिला है। क्योंकि, लंबी न्यायालयीन कार्रवाई के बाद जब श्रमिकों के हक में फैसला आया और उनकी बकाया वेतन राशि की वसूली का आदेश दिया तो अब प्रशासनिक स्तर पर मामला मानो ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है। ऐसे में एक नही बल्कि अनेक सवाल उठना लाजमी है। खैर, ये सब प्रशासन तथ न्यायालय के बीच का मामला है। परंतु इसका सीधा असर उन श्रमिकों पर पड़ रहा है, जो अब भी न्याय पाने की मुद्रा में दिखई दे रहे हैं। बता दें कि मामला इन्दौर रोड स्थित सोयाबीन प्लांट के प्रबंधन तथा श्रमिकों के बीच का है। श्रमिकों के मुताबिक करीब २९ साल की लंबी लड़ाई के बाद 10 महिने पहले न्याय की उम्मीद उस समय जागी, जब श्रम न्यायालय नर्मदापुरम ने कलेक्टर हरदा को एक आदेश जारी कर कहा कि श्रमिकों के लगभग 10-10 लाख रुपए वेतन की वसूली के लिए श्रीनाथजी साल्वेंट प्रा.लि को आरसीसी जारी कर कार्रवाई की जाए। बताया जा रहा है कि कार्यालय कलेक्टर को उक्त आदेश मिले 5 माह से अधिक समय हो चुका है। लेकिन अभी तक जिला कलेक्टर ने फैक्ट्री प्रबंधन से श्रमिकों की बकाया वेतन राशि की वसूली को लेकर कोई सुगबुगाहट नजर नही आई है। परिणामस्वरूप श्रमिक केवल न्याय की आस लगाए बैठे हैं। हालांकि लंबा समय बीतता हुआ देख श्रमिक कार्यालय कलेक्टर एवं श्रम न्यायालय के चक्कर लगाने को विवश हैं। इसी कड़ी में मंगलवार को श्रमिकों ने एक बार फिर जनसुनवाई में पहुंचकर कलेक्टर ऋषि गर्ग के नाम एक आवेदन दिया है। जिसके जरिये श्रम न्यायालय नर्मदापुरम की ओर से जारी आरआरसी अनुसार श्रीनाथ साल्वेंट प्रा.लि से वेतन का भुगतान सुनिश्चित कराने की मांग की है।
1994 में नौकरी से निकाला था
मामले पर रोशनी डालते हुए सोया कर्मचारी यूनियन (इंटक) के अध्यक्ष संदीप शर्मा ने बताया कि प्लांट में श्रमिकों की मांगों और समस्याओं के समाधान को लेकर यूनियन के महामंत्री सुरेश और मंत्री असलम के साथ मिलकर श्रमिकों ने 1994 में ट्रेड यूनियन का पंजीयन कराकर आंदोलन की राह अपनानी पड़ी। इससे नाराज प्रबंधन ने दुर्भावना पूर्वक उन्हें नौकरी से निकाल दिया। इसके खिलाफ श्रमिकों ने श्रम न्यायालय भोपाल में केस दायर कर नौकरी पर रखने और पुराना वेतन देने की मांग की। जिस पर न्यायालय में करीब 10 वर्ष चली सुनवाई के बाद यह साबित हुआ कि श्रमिकों को दुर्भावनापूर्वक नौकरी से निकाला गया। जिस पर न्यायालय ने उन्हें नौकरी लौटाने और पुराने वेतन का भुगतान करने का आदेश दिया था। जिसके खिलाफ प्रबंधन ने औद्योगिक न्यायालय में अपील दायर की। यहां पर भी करीब 4 साल तक मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय ने श्रमिकों के पक्ष में आदेश बरकरार रखा। इस आदेश के खिलाफ सोयाबीन प्लांट प्रबंधन ने उच्च न्यायालय जबलपुर में अपील की।
गलत तरीके से कर दिया ट्रांसफर
यूनियन के अध्यक्ष संदीप शर्मा ने बताया कि इस बीच प्लांट प्रबंधन ने श्रमिकों को नौकरी पर वापस तो रखलिया, लेकिन अवैध तरीके से संबंधितों का कोटा और अकोला ट्रांसफर कर दिया। इसके विरूद्ध भी श्रमिकों ने आवाज उठाई और श्रम न्यायालय नर्मदापुरम का दरवाजा खटखटाया। यहां केस दायर कर हरदा स्थित प्लांट में ही नौकरी पर रखने की मांग की। जिस पर श्रम न्यायालय ने श्रमिकों के स्थानांतरण को अवैध मानते हुए श्रमिकों को हरदा प्लांट में ही नौकरी पर लेने और पुराना भुगतान करने के आदेश प्रबंधन को दिए। लेकिन प्रबंधन ने आदेश को अब तक नही माना है। यही वजह है कि श्रम न्यायालय नर्मदापुरम ने हरदा कलेक्टर को आदेश जारी कर आरआरसी के माध्यम से श्रीनाथजी साल्वेंट से वेतन की वसूली करने के निर्देश दिए हैं
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