खंडवा- इंदौर से अकोला ब्राडगेज कन्वर्जन में खंडवा लोकसभा क्षेत्र का बड़ा हिस्सा आता है। यह क्षेत्र दिल्ली के रेल मंत्रालय में पिछड़ा नजर आता है। मुश्किल से बजट आता है। उच्च अधिकारियों और देश के बड़े ठेकेदारों पर जनप्रतिनिधियों का नियंत्रण पता नहीं क्यों नहीं है? डबल इंजन की सरकार के साथ खंडवा लोकसभा क्षेत्र में सरपंच से सांसद तक भाजपा के हैं। रेल मंत्रालय इस संबंध में कभी भी बड़ी जांच टीम बनाकर घटनास्थल गुड़ी भेज सकती है। वहां सबूत मिटाने का काम भी तेजी से चलने की सूचना है।
यहां 15 हजार करोड़ के रेलवे के काम चले और चल रहे हैं। साउथ के अधिकतर ठेकेदारों ने दबंगता से काम किया। रेल जैसे महत्वपूर्ण कामों में भी घटिया काम करके चले गए। खंडवा की नर्मदा जल योजना भी साउथ के ठेकेदार जीम गए। जनप्रतिनिधि आखिर क्यों तमाशा देखने को विवश हैं?
रेल की पटरियां व निर्माणाधीन पुलिया धंसने पर सामाजिक संस्था जनमंच ने रेलमंत्री और महाप्रबंधक साउथ सेंट्रल रेलवे को मेल और ट्वीट के माध्यम से इस संदर्भ में अपने मत से अवगत कराया और भविष्य में गुणवत्ता और जनरक्षा का विशेष ध्यान देते हुए गेज कनवर्जन का कार्य करने की मांग की, जिससे भविष्य में कोई अनहोनी ना हो। जनमंच के चंद्र कुमार सांड, अनुराग बंसल, कमल नागपाल, देवेन्द्र जैन, प्रेमांशु जैन, डा. जगदीश चंद्र चौरे, दीपक महेश्वरी, सुभाष सोनी, प्रसन्न सोनी ने एक साथ ट्वीट व मेल किए। बताया जा रहा है कि नई रेलवे लाइन में लगभग 700 मीटर ट्रैक क्षतिग्रस्त हुआ है, जिससे लगभग ढाई किलोमीटर ट्रैक को भारी नुकसान पहुंचा है। इससे रेलवे को लगभग 10 करोड़ रुपए का आर्थिक नुकसान भी हुआ है।

