नर्मदा में नावें बंद, प्रशासन व नाविकों में टकराव?

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ओंकारेश्वर- श्रावण के पहले हफ्ते में ही ओंकारेश्वर की नर्मदा में नावें बंद करा दी हैं। नाविकों और प्रशासन में टकराव से देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को हर्जाना भुगतना पड़ रहा है। प्रशासन न तो मंदिर में दर्शन सुलभ करा सका है। न ही ओंकारेश्वर की व्यवस्थित सफाई हो रही है। न ही नावों का संचालन ढंग से करवा पा रहा है। सबसे दोषी नगर परिषद का प्रशासन है। एसडीएम व कलेक्टर तो ओंकारेश्वर जैसे संवेदनशील क्षेत्र को हल्के में लेते हैं। यहां नगर परिषद में कड़क व वरिष्ठ रैंकधारी सीएमओ की जरूरत है।
फिलहाल ओंकारेश्वर की नर्मदा में अवैध व वैध दोनों तरह की नावें चल रही हैं। इसके पीछे नेताओं की दखलंदाजी है। सावन में कोई बड़ा हादसा हो गया तो कौन जवाबदार रहेगा? तरीके से नावों के संचालन आदेश व व्यवस्था में केवल एक दिन लगता है। यहां तो इसके हल के लिए फोड़े को नासूर बना दिया गया है।

नाविक संघ व प्रशासन के बीच तालमेल नहीं होने के कारण ऐसा हो रहा है। नाविक संघ अध्यक्ष कलेक्टर खंडवा से मिले। अवैध नावों को लेकर चर्चा की। गुरुवार को फिर नर्मदा नदी में नौका संचालन को लेकर नाविक संघ व प्रशासन के बीच तालमेल नहीं बैठ पाया। नावों का संचालन फिर  बंद कर दिया गया।
नाविक संघ अध्यक्ष भोलाराम केवट का कहना है कि बैठक में निर्णय के बाद फिर अवैध नावें चलने लगी हैं। प्रशासन सहयोग नहीं कर रहा है। लाइसेंस देने की मांग प्रशासन से की जा रही है। कुछ लोग मनमानी के कारण नाविक संघ की छवि खराब हो रही है। ओंकारेश्वर में 180 नावें हैं, जो रजिस्टर्ड हैं।

भोलाराम केवट ने बताया कि बाकी नाव अवैध रूप से चलाई जा रही हैं। नगर पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने आश्वासन दिया है कि  दो कर्मचारी नगर परिषद के घाटों पर रहेंगे। जो वैध नावों को ही चलने देंगे।
नाविक विधायक नारायण पटेल से कलेक्टर द्वारा बंद किए जाने पर मुलाकात की। विधायक ने कहा नियमों के तहत संचालन होगा। नाविकों में तालमेल की जरूरत है। नर्मदा नदी में नाव की संख्या बढ़ती जा रही है। घाट सीमित वह छोटे पड़ने लगे हैं। राजनीति संरक्षण के चलते अभी तक नौका संचालन प्रशासन की कार्रवाई के बाद जनप्रतिनिधियों ने इंजन वापस कई बार दिलवा दिए।

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