नगर परिषद में चला हाई वोल्टेज ड्रामा

WhatsApp Image 2025-09-19 at 11.24.35 PM

-भुगतान नहीं होने से व्यापारी ले जाने लगे परिषद का फर्नीचर

 नगर परिषद के आए दिन नए नए मामले सामने आ रहे हैं। जिसमें नगर परिषद की उदासीनता और ताराशाही सामने आ रही है। इन सबके बावजूद भी नगर परिषद अपनी हठधर्मिता से बाज नहीं आ रही है। शुक्रवार को ऐसा ही एक नया मामला सामने आया जिसमें व्यापारी ने अपने सामग्री का भुगतान न होने के कारण कार्यालय से अपना सामान बाहर निकाल लिया। परिषद अध्यक्ष के मान मनोबल और आश्वासन के बाद व्यापारी ने भुगतान पाने 1 महीने की राहत दी।

अनोखा तीर, सिराली। शुक्रवार को परिषद कार्यालय खुलने के कुछ ही घंटों के बाद एक हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। जिससे नगर परिषद सीएमओ, उपाध्यक्ष और पार्षदों की मौजूदगी में भुगतान नहीं मिलने से नाराज व्यापारी ने अपने कर्मचारियों की सहायता से नगर परिषद कार्यालय को दिया फर्नीचर वापस निकाल लिया। व्यापारी पिछले 2 वर्ष से भुगतान नहीं मिलने के कारण परिषद के चक्कर काट कर परेशान हो गया था। आखिरकार व्यापारी का सब्र का बांध टूटा और परिषद में रखा पुराना सामान वापस निकलवा लिया। इस बात की भनक जैसे ही व्यापारियों को लगी तमाम बकाया दार व्यापारी जिन्हें परिषद से भुगतान लेना था वह भी परिषद में एकत्र होने लगे। देखते ही देखते करीब दो दर्जन व्यापारी परिषद के बाहर एकत्र हो गए और अपने-अपने भुगतान की मांग करने लगे। इनमें बताया जाता है कि कहीं चाय वाले, झाड़ू तगारी हार्डवेयर सामग्री, स्टेशनरी, हलवाई, ठेकेदार, अखबार वाले सभी अपने-अपने भुगतान पाने परिषद के दफ्तर पहुंच गए। दोपहर करीब 2.30 बजे नगर परिषद में घंटों हाई वोल्टेज ड्रामे जैसी स्थिति रही। इसका अंत तब हुआ जब नगर परिषद अध्यक्ष अनीता अग्रवाल ने स्वयं फोन लगाकर परेशान व्यापारी को एक माह में स्वयं भुगतान करने या करवाने की बात कही। इसके बाद संबंधित व्यापारी फर्नीचर सामान छोड़कर वापस लौट गए।
ठेकेदार ने दी आत्महत्या की धमकी
नगर परिषद के खेल मैदान में गैलरी निर्माण का कार्य कर रहे राजधानी कंस्ट्रक्शंस निर्माण एजेंसी को कई महीनों से कार्य का भुगतान नहीं हुआ था और वह कार्यालय के बार-बार चक्कर लगा रहा था आखिरकार उसका भुगतान नहीं किया गया। जिससे तंग आकर ठेकेदार द्वारा परिषद में लिखित रूप से भुगतान नहीं होने की स्थिति में आत्महत्या करने की बात कही थी। जिसके बाद उस ठेकेदार को 50 लाख में से 5 लाख का भुगतान किया गया। शेष भुगतान अभी बाकी है। इसके अलावा अन्य ठेकेदार भी भुगतान के लिए परिषद के चक्कर काटते देखे जा सकते हैं, जो परिषद खुलने के साथ पहुंचते हैं और परिषद बंद होने के बाद घर पहुंच जाते हैं।
लाखों करोड़ों खर्च के बाद भी नहीं दिख रही मूलभूत सुविधाएं
विगत दिनों परिषद की हुई बैठक में पार्षदों की माने तो विकास कार्य और किए हुए खर्च का ब्यौरा जानने पर नगर परिषद में लाखों-करोड़ों का खर्चा होना बताया था। किंतु धरातल पर कोई भी विकास कार्य नजर नहीं आ रहा है। ना ही नगर वासियों को मूलभूत सुविधाओं का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में जनता जानना चाहती है कि आखिर लाखों करोड़ों रुपए खर्च कहां हुए, उन्हें इन रुपयों की क्या उपयोगिता मिली। क्योंकि नगर में हर जगह समस्याओं का अंबार लगा है। नाली, सड़क, लाइट सुलभ शौचालय जैसी सुविधाओं से वंचित नगरवासी अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
भाजपा की लुटिया डुबा रही नप की कार्यप्रणाली
भाजपा की केंद्र एवं प्रदेश सरकार जिस तरह से आमजन को लाभ पहुंचाने के लिए दिन रात प्रयास कर रहे हैं और हर तरह की मूलभूत सुविधा देने के लिए प्रयासरत रहकर लोगों को जोड़ा जा रहा है। उसी की तरह बूथ विस्तारक भी गांव गांव जाकर जनता को शासन की योजनाओं से जोड़ रहे हैं। किंतु वहीं दूसरी ओर नगर परिषद सिराली की कार्यप्रणाली से जनता भाजपा से खफा होती दिखाई दे रही है। क्योंकि जिस उम्मीद और आशा के साथ नगर की जनता ने अध्यक्ष उपाध्यक्ष और पार्षद भाजपा समर्थित चुनकर भेजे थे और उम्मीद जताई थी कि भाजपा समर्थित नगर परिषद नगर का चौमुखी विकास करेगी। किंतु विकास में पिछड़ा नगर अब जनता का मुंह चढ़ा रहा है और जनता भाजपा से काफी नाराज दिखाई दे रही है। जिसका खामियाजा आने वाले चुनाव में पार्टी को भुगतना पड़ सकता है। इस बात को लेकर चर्चाओं का बाजार सिराली में गर्म है।
सोशल मीडिया पर छाई नगर परिषद
इन दिनों सोशल मीडिया के व्यापारी गु्रप पर नगर परिषद की चर्चाएं आम हो रही है। कोई विकास कार्यों को लेकर परिषद को लताड़ रहा है तो कोई अपने बकाया बिलों के भुगतान को लेकर एकजुट हो रहे हैं। तो कई लोग गु्रप पर इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। व्यापारी संघ के अध्यक्ष भगवान राजपूत ने बताया कि सिराली के समस्त बकाया व्यापारी जिन्हें परिषद से भुगतान लेना है। सब एक जगह एक प्लेटफार्म पर एकत्रित होकर अपने बिल संघ के पास जमा करें और व्यापारी गु्रप में अपने बिल की प्रति डालें, तो कई लोग नगर परिषद को हंसी का पात्र बता रहे हैं।
सीएमओ की तानाशाही से अटका भुगतान
विश्वसनीय सूत्रों एवं व्यापारियों की मानें तो परिषद में अटका भुगतान सीएमओ की तानाशाही के कारण अटका हुआ है। जबकि बिल समिट हो चुके हैं और अध्यक्ष की भी सहमति मिल चुकी है। इसके बावजूद भी जवाबदार अधिकारी भुगतान करने से कतरा रहे, जिसका खामियाजा व्यापारी को भुगतना पड़ रहा है। इस संबंध में सीएमओ शीतल भलावी से फोन पर संपर्क करना चाहा, लेकिन उनके द्वारा कॉल रिसीव नहीं किया गया। इस संबंध में नगर परिषद अध्यक्ष अनिता अग्रवाल से संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि परिषद के बकाया बिलों के भुगतान में उनकी पूर्ण सहमति है, किंतु सीएमओ द्वारा हठधर्मिता कर बिलों का भुगतान नहीं किया जा रहा है। साथ ही परिषद के विकास कार्यों में तालमेल न बनाकर मनमानी की जा रही है। सभी व्यापारियों का भुगतान किया जाएगा।
बारिश में भीगता रहा फर्नीचर
व्यापारी द्वारा नगर परिषद से अपना फर्नीचर बाहर निकाल लिया। लेकिन अध्यक्ष की समझाइश के बाद व्यापारी अपना फर्नीचर परिषद के बाहर छोड़कर चला गया। किंतु परिषद द्वारा फर्नीचर को परिषद में नहीं रखा गया। खबर लिखे जाने तक फर्नीचर बारिश में भीगता रहा। इधर परिषद के सूत्रों ने बताया कि अब सीएमओ ने सामान वापस रखने से मना कर दिया है। फर्नीचर व्यापारी राजेश चौहान की बकाया राशि करीब 70 हजार रुपए और अन्य व्यापारियों के करीब 15 लाख रुपए की राशि बकाया होने का अनुमान है। ्र इस मौके पर फर्नीचर व्यापारी राजेश चौहान, खेल मैदान में गैलरी निर्माण एजेंसी प्रतिनिधि देवकीनंदन चौरे, व्यापारी मनल अग्रवाल, राजू गौर, गोलू राजपूत, रामू प्रजापति, सुजल नयनपुरे, विश्वकर्मा समेत अनेक व्यापारी मौजूद थे।

Views Today: 4

Total Views: 388

Leave a Reply

error: Content is protected !!