जिनवाणी को जीवन में उतारना ही धर्म है – अनुभव शास्त्री

WhatsApp Image 2025-09-19 at 11.24.35 PM

खंडवा- अपने अंदर के काषायिक एवं विकारी भावों को मंदता प्रदान करना ही धर्माचरण की प्रथम सीढ़ी है। आज प्रत्येक जीव जन्म से ही क्रोध, मान, माया, लोभ एवं पांच प्रकार के पापों में जकड़ा हुआ है। अपने आपको पापों से बचाने के लिए एकमात्र धर्म एवं धर्म गुरु ही सहारा है। जिनेन्द्र भगवान की वाणी और उस पर दृढ़ श्रद्धा करके हम इन पाप आदि कर्मों से छुटकारा पा सकते हैं।
उक्त बात जैन आगम के युवा विद्वान अनुभव शास्त्री ने प्रवचनमाला में कही। जिनवाणी की महत्ता एवं अनुसरण की अनिवार्यता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि शांति प्राप्त करने के लिए जिनवाणी में कहे गए सिद्धांतों पर विश्वास करना चाहिए। मात्र प्रवचन सुनना ही महत्वपूर्ण नहीं है, धर्म गुरुओं की शिक्षा व शास्त्रों, ग्रन्थों में लिखी गई बातों को चारित्र रूप में धारण भी करना चाहिए। धर्म को आचरण में लाने वाला धर्मात्मा, धर्म को सुनने वाला धर्मज्ञ एवं धर्म को जानकर बोलने वाला धर्मविज्ञ कहलाता है।
समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया कि  से नगर के जिन मंदिरों में अष्टानिका पर्व की भक्तिमय शुरुआत हो गई है। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से पूर्णिमा तक मनाए जाने वाले आठ दिवसीय इस पर्व के दौरान प्रतिदिन सभी जैन मंदिरों में भगवान का जलाभिषेक, शांतिधारा एवं नंदीश्वर द्वीप पूजन व विधान आदि कार्यक्रम होंगे। महिला पुरुषों ने उपवास, एकाशन आदि रखकर संयम व्रत का पालन भी किया। पर्व के मुख्य कार्यक्रम सराफा स्थित पोरवाड़ जैन मंदिर में सम्पन्न हो रहे है।

पोरवाड़ दिगम्बर जैन मंदिर के ट्रस्टी पंकज जैन महल ने बताया कि अष्टानिका पर्व वर्ष में तीन बार आते है। चातुर्मास काल में आने से आषाढ़ मास के पर्व का विशेष महत्व होता है। समाज द्वारा प्रवचन व स्वाध्याय के लिए अखिल भारतीय श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर से युवा विद्वान अनुभव शास्त्री को आमंत्रित किया गया है। पोरवाड़ धर्मशाला सराफा में प्रतिदिन प्रात: 8.15 से आचार्य अमोघवर्ष द्वारा रचित प्रश्नोत्तर रत्नमालिका ग्रन्थ पर विशेष व्याख्यान एवं रात्रि में 8 बजे से आचार्य शुभचन्द्र द्वारा विरचित ज्ञानार्णव ग्रन्थ के द्वारा स्वर विज्ञान की कला सिखायी जा रही है। दोपहर में पंडित निखलेश जैन के सानिध्य में तेरहदीप मण्डल विधान की पूजन एवं शाम को संगीतमय जिनेंद्र आरती, सामायिक एवं प्रतिक्रमण कराया जा रहा है।
पोरवाड़ जैन मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष वीरेंद्र जैन ने बताया कि पर्व के इन आठ दिनों में सराफा स्थित  पार्श्वनाथ जैन मंदिर में प्रतिदिन पंचामृत अभिषेक एवं शांतिधारा होगी। प्रथम दिवस शांतिधारा का सौभाग्य प्रेमांशु पुष्पेंद्र जैन (भामगढ़ परिवार) ने प्राप्त किया। मंगलाचरण कांतिलाल जैन एवं दीप प्रच्वलन सुषमा प्रमोद जैन व सुभद्रा जीजी ने किया। कार्यक्रम में संतोष जैन बोस, महेश जैन, प्रकाश जैन, अजय जैन टिंगू, प्रेमांशु चौधरी, सुनील जैन, विनय चौधरी, राजकुमारी जैन, विनीता जैन, योगिता जैन, अर्चित योगेंद्र जैन आदि समाजजन उपस्थित थे।

Views Today: 2

Total Views: 148

Leave a Reply

error: Content is protected !!