डेढ़ घंटे तक जोरदार पानी बरसा, सड़कें तरबतर

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बारिश ! कहीं खुशी तो कहीं उदासी का आलम  

 

अनोखा तीर, हरदा। जून के अंतिम सप्ताह में जहां बारिश का दौर शुरू हो गया है, वहीं उसकी आमद के चलते लोगों को भीषण गर्मी तथा चुभने वाली उमस से निजात मिला है। इस बीच सोमवार शाम को मुख्यालय समेत अन्य तहसील क्षेत्रों में जोरदार पानी बरसा है। शाम 5 बजे के आसपास शुरू हुई बूंदाबांदी देखते ही देखते मूसलाधार बारिश में तब्दील हो गई, जो करीब सवा घंटे तक एक जैसा बरसा। इस दौरान जो व्यक्ति जहां था, उसे वहीं रूकना पड़ा। बारिश का ये उग्र रूप शाम 7 बजे शांत हुआ। परंतु आसमान में घने बादलों का डेरा बरकरार रहा। वहीं गर्जना के साथ जारी बिजलाव रात्रि में बारिश का संकेत दे रहे थे। इस दौरान लोग अपने जरूरी कामों को पूरा करते हुए दिखाई दिये। जिसमें फसलों की सुरक्षा, मकान में यहां-वहां टपक रहे पानी की साल-संभाल तथा मकान तथा रास्ते पर भरे पानी को निकालने की जुगत कर रहे थे। बता दें कि जून के आखिरी सप्ताह में मानसून की सक्रियता से कृषि कार्यो को बल मिला है, अन्यथा किसान पानी की राह तांकते-तांकते उंगलियों पर केवल दिन काट रहे थे। परंतु 23 जून को हुई बारिश ने क्षेत्र में बुआई का रास्ता साफ कर दिया। जिसका फायदा उठाते हुए किसानों ने जरा देर नही की और खेतों में ट्रेक्टरों को उतार दिया। परिणामस्वरूप 24-25 तारीख को बड़े रकबे में बुआई संपन्न हो चुकी है। जिसके ऊपर बरसे पानी को जर्मिनेशन की दृष्टि से फायदेमंद बताया जा रहा है। जबकि बुआई का ये क्रम सोमवार 26 जून को भी जारी रहा। लेकिन इसी दिन शाम को झमाझम बारिश ने किसानों की बेफिक्री को चिंता में बदल दिया है। हालांकि उनकी चिंता की मुख्य वजह संशय है, जो उस ओर सोचने को विवश करता है कि बोवनी जम जाएगी या आधा-अधूरा जर्मिनेशन होगा जैसी बातें घेर रखेंगी। इस बीच ये भी मुनासिब है कि अगले 4-5 दिन में चासमंद जर्मिनेशन दिखाई दें। इन सब चर्चाओं के बीच ऐसे किसानों के समक्ष असमंज्स्य लाजमी है।

तरबतर हुई सड़के

झमाझम बारिश के कारण पूरा वातावरण खुशनुमा हो गया है। वहीं गर्मी और उमस की मानो विदाई कर दी है। बीतें चार दिन में कुल दो बार बरसे जोरदार पानी ने सड़कों को तरबतर कर दिया है। वहीं पेड़-पौधों में हरियाली की छंटा दिखने लगी है।

सोयाबीन पर दांव

विगत तीन दिनों से क्षेत्र में जारी बुआई कार्य दौरान अब तक किसानों ने सबसे ज्यादा सोयाबीन की फसल बोई है। जबकि दूसरे पायदान पर मक्का का नंबर आता है, जो सोयाबीन के बाद बारिश में बोई जाने वाली उपयुक्त फसलों में से एक है।

 

जलमग्न हुआ बाजार क्षेत्र  

इधर, तेज बरसात के कारण शहर की ड्रेनेज व्यवस्था की पोल खुल गई है। सर्वाधिक समस्या शहर के मुख्य बाजार क्षेत्र घंटाघर तथा बड़ा मंदिर के सामने देखने को मिली। यहां ड्रेनेज चोक हो जाने के कारण सड़क पर डेढ़ से दो फिट पानी भरा हुआ था। जो कि आसपास की दुकानों के प्रवेश द्वार तक पहुंच गया। इस दौरान लोगों को खासकर महिलाओं को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। व्यापारी आदित्य कुमार एवं शुभम ने बताया कि हर साल बारिश के मौसम में यह समस्या गहरा जाती है। जिसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ता है। वहीं इसका सीधा असर व्यापार पर भी होता है। उन्होंने यह भी बताया कि शहर के बाजार क्षेत्र में व्याप्त इस समस्या का समाधान किया जाना चाहिए।

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