49 भैया-बहनों का पुष्य नक्षत्र में स्वर्णप्राशन कराया गया

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देवास- स्वर्णप्राशन महर्षि कश्यप द्वारा प्रणीत ऐसी पद्धति है, जिसमें स्वर्ण अर्थात सोने की कुछ मात्रा अन्य औषधियों के साथ बच्चों को दी जाती है। इससे उनकी बुद्धि, आयु तथा तेज पढ़ता है। आज अमेरिका जैसे विकसित देशों में सर्जरी के बाद मरीज को जल्दी ठीक करने के लिए स्वर्ण का प्रयोग किया जा रहा है। हमारे देश में आयुर्वेद के अनुसार औषधियों के साथ स्वर्ण के सेवन की परम्परा हजारों वर्षों पुरानी है। उक्त बात विद्यालय में आयोजित योग दिवस व स्वर्णप्राशन कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर सेवा भारती के जिला सचिव डॉ. अश्विन दुबे ने कही।

विद्यालय में डॉ. दुबे के मुख्य आतिथ्य एवं डॉक्टर नवीन कानूनगो, आरोग्य भारती के देवास जिला सह सचिव के विशेष आतिथ्य एवं नरेंद्र जैन की अध्यक्षता में स्वर्णप्राशन कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर विद्यालय में 49 भैया बहनों का पुष्य नक्षत्र में स्वर्णप्राशन कराया गया। भैया बहनों के साथ उनके पालक भी कार्यक्रम में उपस्थित थे। विद्यालय में स्वर्ण प्राशन का यह कार्यक्रम प्रतिमाह पडऩे वाले प्रत्येक पुष्य नक्षत्र में किया जावेगा।

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