खंडवा- स्थूल का निर्माण होता है, जैसे भवन आदि का तथा सूक्ष्म की रचना होती है जैसे साहित्य, संस्कृति आदि की। विश्व को देने को बहुत है हमारे पास। हमारे यहां काल चक्रीय है। काल अनंत है, उसमें हमारी संस्कृति सनातन है। आततायियों के आक्रमण के बावजूद ज्ञान परम्परा से भारत सुरक्षित रहा। आजादी का अमृत काल युवाओं का भी अमृत काल है। राष्ट्र के लिए यह पीढ़ी महत्वपूर्ण है क्योंकि पीढ़ी का आयात नहीं किया जा सकता। कणाद, सुश्रुत, बोधायन आदि ऋषियों के किए शोध पर दृष्टि डालकर सोचिए कि सारे वैज्ञानिक आविष्कार विगत 300 साल में ही क्यों हुए? हमारी धरोहर पर यूरोप ने आधिपत्य कैसे किया? युवा मशीन के दास न बनें, वरन् पुस्तकों का अध्ययन कर चिंतनशील बनें।
उक्त विचार देश के ख्यातिलब्ध निबंधकार, शिक्षाविद्, चिंतक डॉ श्रीराम परिहार ने नीलकंठेश्वर शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में गणित विभाग एवं कंप्यूटर विभाग द्वारा आजादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत आयोजित संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में व्यक्त किए। भारत बोध विषय पर केंद्रित संगोष्ठी कार्यक्रम के प्रारंभ में विषय का प्रवर्तन कर अतिथि का परिचय संगोष्ठी की संयोजिका एवं गणित विभागाध्यक्ष डॉ मनीषा साकल्ले ने दिया। अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए संस्था प्राचार्य डॉ गणेश प्रसाद दावरे ने स्वामी विवेकानंद, पुष्प की अभिलाषा का उदाहरण देते हुए भारतीय संस्कृति के उत्थान का मार्ग प्रशस्त किया। साथ ही प्रकृति, वृक्ष, नदी, पहाड़, मानव पूजन के माध्यम से भारतीय संस्कृति के महत्व को प्रतिपादित कर समरसतापूर्ण समाज की अवधारणा को स्पष्ट किया। अंत में अतिथियों का आभार कंप्यूटर विभागाध्यक्ष प्रो प्रवीण पाटिल ने व्यक्त किया।
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